70वीं BPSC के रिजल्ट सेलिब्रेशन के नाम पर इसी बापू सभागार में भीड़ जुटाई गई थी। फोन करके ऐसे लोगों को भी बुलाया गया, जिनका संबंधित कोचिंग संस्थान से कोई संबंध तक नहीं था। कुछ लोग तो अपने परिवार के साथ रील बनाने, गिफ्ट पाने और भोज का आनंद लेने पहुँचे थे।
वहीं, कुछ लोग मंच पर सलेक्शन, स्ट्रैटजी और तैयारी के दौरान आई मुश्किलों की अलग-अलग कहानियाँ सुना रहे थे।
सवाल वही है क्या यह सफल अभ्यर्थियों का सम्मान समारोह था या कोचिंग संस्थानों की मार्केटिंग का एक सुनियोजित आयोजन ?
कुछ सवाल, जो आपको सोचने पर मजबूर कर देंगे!
उत्तर प्रदेश PCS का रिजल्ट आता है। परीक्षा कठिन होती है, शानदार प्रतिभाएँ सफल होती हैं, लेकिन क्या आपने वहाँ भी ऐसे भव्य सेलिब्रेशन और कोचिंग संस्थानों का शक्ति-प्रदर्शन देखा है ?
देश के दूसरे राज्यों में भी State PCS के रिजल्ट आते हैं, अभ्यर्थी सफल होते हैं, लेकिन क्या वहाँ भी सलेक्शन के नाम पर कोचिंग संस्थानों की रीलें इसी तरह कटती हैं ?
केरल देश के सबसे अधिक साक्षर राज्यों में है। वहाँ से भी UPSC और State PCS में अभ्यर्थी सफल होते हैं। क्या आपने वहाँ किसी को आचार-रोटी के उदाहरण देकर कैमरे के सामने मोटिवेशन का बाजार सजाते देखा है ?
आखिर बिहार में सलेक्शन का जश्न मनाया जा रहा है या सलेक्शन के नाम पर कोचिंग का कारोबार चमकाया जा रहा है ?
🚨 एक बड़ी खबर!
बापू सभागार की भीड़ का पूरा खेल क्या है ?
आखिर भीड़ इकठ्ठा कहां से आ रही है। ठीक उसी तरह काम कर रहीं हैं जैसे फिल्मों में ऑडियंस को बुलाया जाता है।
बापू सभागार में आए दिन होने वाले इंफ्लूएंसर मास्टरों और कोचिंग संस्थानों के भव्य आयोजनों में उमड़ने वाली भीड़ को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, इस भीड़ का एक हिस्सा 100 200 रूपये देकर जुटाया जाता है। फिल्मों की शूटिंग में जिस तरह पैसे देकर दर्शक बुलाए जाते हैं, उसी तर्ज पर इन आयोजनों में भी भीड़ जुटाने का आरोप है। यानी सभागार में मौजूद हर शख्स UPSC, PCS , SSC का गंभीर अभ्यर्थी हो, यह जरूरी नहीं!
भीड़ जुटाने का कथित नेटवर्क कैसे काम करता है ? ( पटना में रहने वाले बच्चों के सर्वे अनुसार)
▪️ पटना की कई फिजिकल एकेडमियों के संचालकों के जरिए बच्चों को बुलाने का दावा किया जाता है।
▪️ लाइब्रेरी और जिम संचालकों को कथित तौर पर पैसे देकर उनके ग्राहकों को भी आयोजनों में भेजा जाता है।
▪️ इस तरह आयोजनों में भारी भीड़ दिखाकर कोचिंग संस्थानों की लोकप्रियता और छात्रों के बीच उनके प्रभाव का माहौल बनाया जाता है।
सबसे बड़ा सवाल: क्या इन आयोजनों में जुटने वाली भीड़ वास्तव में छात्रों के भरोसे का प्रमाण है, या फिर भीड़ के पीछे कोई प्रायोजित व्यवस्था काम कर रही है ?
यूपीएससी हो या बीपीएससी या एसएससी की तैयारी कोई मनोरंजन का मंच नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य का सवाल है। कोचिंग संस्थानों को अपनी लोकप्रियता का प्रदर्शन करने के बजाय अपनी शिक्षा की गुणवत्ता और परिणामों पर जवाब देना चाहिए।
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