मेरा खून जलता नहीं, मैं समय पर रक्तदान कर देता हूँ ताकि खून में नयापन, उबाल और उत्साह बना रहे।
हमारा विश्लेषण-विमर्श अगर कुछ प्रमुख राष्ट्रीय अख़बारों की राय से मेल खा जाए, तो उत्साहवर्धन स्वाभाविक है। बाक़ी, सरकारें तो बदलती रहती हैं, असली नुकसान तब होता है जब पत्रकार बदल जाता है।
बाक़ी सबका अपना-अपना विश्लेषण और अपना-अपना नज़रिया है।
यार भाईसाहब
आप सप्ताह भर से अपना खून जला रहे हैं
वो भी बीजेपी के लिए। आखिर क्यों?
30 बरस से देख रहा हूं। राजस्थान के लोगों ने कभी किसी पार्टी को माफ किया ही नहीं। हर पांच साल में अनिवार्य तौर पर लोग सरकार पलट देते हैं। फिर काहे की वार्निंग? काहे की चेतावनी? जन्नत की हकीकत दोनों पार्टियां जानती नहीं हैं क्या आपके हिसाब से?
आप रोज लंबे विश्लेषण कर रहे हैं, आंकड़े ला रहे हैं, खबरों के लिंक डाल रहे हैं। किसके लिए? जिनको बताना चाह रहे हैं, वे तो जश्न में डूबे हुए हैं। बाकी किसी को कोई फड़क पड़ता हो, इसका आइडिया नहीं है।
थोड़ा रिलैक्स कीजिए। प्लीज
पहले वालों से ज्यादा बड़े और चमत्कारी अब वाले हैं, ऐसा आपको लगता हो तो अलग बात है