महर्षि दयानंद सरस्वती जी की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि!
महर्षि दयानंद जी केवल एक महान संन्यासी और विचारक ही नहीं थे, बल्कि उन्होंने भारतीय समाज को अज्ञानता, अंधविश्वास, कुरीतियों और पाखंड के अंधकार से निकालकर 'वेदों की ओर लौटो' का अमर संदेश दिया।
उन्होंने अपने कालजयी ग्रंथ 'सत्यार्थ प्रकाश' के माध्यम से सत्य का निष्पक्ष प्रतिपादन किया और समाज में ज्ञान एवं विवेक की नयी चेतना जगाई।
महर्षि जी ने स्त्री-शिक्षा, छुआछूत के उन्मूलन, बाल विवाह के विरोध और सामाजिक समरसता के लिए जो क्रांतिकारी कदम उठाए, वह आज भी हमारे राष्ट्र-निर्माण की प्रेरणा हैं।
महर्षि जी का स्पष्ट संदेश था कि प्रकृति के नियमों के अनुकूल जीना, गौ-संवर्धन करना, यज्ञ-हवन द्वारा पर्यावरण को शुद्ध रखना और सात्विक आहार अपनाना ही मानव-मात्र के कल्याण का मार्ग है।
आइए, महर्षि दयानंद सरस्वती जी के दिखाए मार्ग पर चलकर समाज से अज्ञानता और कुरीतियों को मिटाएं, स्वदेशी और नैतिक मूल्यों को अपनाएं और समृद्ध एवं विकसित भारत के निर्माण में अपना योगदान दें।