सिमडेगा दौरे के क्रम में आज जलडेगा और ठेठईटांगर प्रखंड के सुदूरवर्ती ग्राम कोनमेरला और कहुपानी पहुंचकर लाह की खेती का अवलोकन किया और किसान भाई-बहनों से सीधा संवाद किया।
इन दूरदराज के गांवों में किसानों का उत्साह और लाह की खेती के प्रति उनका समर्पण देखकर मन बेहद प्रसन्न हुआ। मेरा मानना है कि जब सरकार का मंत्री खेत-खलिहान तक, गांव की पगडंडियों से होते हुए किसानों के बीच पहुंचता है, तभी योजनाओं की जमीनी हकीकत समझ में आती है।
विभाग में कई योजनाएं संचालित हैं, लेकिन किसी भी योजना की वास्तविक सफलता तभी सुनिश्चित हो सकती है, जब हम किसानों से बात करके, उनकी जरूरतों और अनुभवों को समझकर योजनाएं बनाएं। जब नीति और योजना का आधार किसान की आवाज बने, तो सफलता की राह और मजबूत होती है।
अक्सर कहा जाता है कि पेड़ पर पैसे नहीं उगते।
लेकिन लाह की खेती करने वाले हमारे किसान इस कहावत को बदल रहे हैं—पेड़ों पर लाह उगाकर अपनी आमदनी और खुशहाली बढ़ा रहे हैं।
हमारा प्रयास है कि सिमडेगा की लाह की पहचान सिर्फ झारखंड तक सीमित न रहे, बल्कि सिमडेगा को पूरे भारतवर्ष में लाह की खेती के लिए जाना जाए।
इसके लिए विभाग द्वारा किसानों को लाह उत्पादन का प्रशिक्षण, टूल किट और लाह का बीहन उपलब्ध कराया जा रहा है। जरूरत है कि अधिक से अधिक किसान अपने नजदीकी केंद्र से प्रशिक्षण लेकर इस अवसर का लाभ उठाएं।