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ॐ जय शिव ओंकारा,स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा,विष्णु,सदाशिव,अर्द्धांगी धारा4॥
अर्थ: ॐकार (प्रणव) रूपी भगवान शिव की जय हो! ब्रह्मा,विष्णु,शिव और शक्ति(पार्वती)सभी आप में ही समाहित हैं।
एकानन चतुरानन पंचानन राजे।
हंसासन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥
अर्थ: हे प्रभु!आप एक मुख(विष्णु),चार मुख(ब्रह्मा)और पाँच मुख (शिव)वाले हैं।आप क्रमशः हंस (ब्रह्मा),गरुड़ (विष्णु)और बैल/नंदी(शिव)की सवारी पर विराजमान होते हैं।
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज सोहे।तीनों रूप निरखता, त्रिभुवन जन मोहे ॥
अर्थ: आपकी दो,चार और दस भुजाएं बहुत सुंदर लगती हैं। आपके इन तीनों रूपों (ब्रह्मा,विष्णु,महेश) को देखकर तीनों लोकों के लोग मोहित हो जाते हैं।