प्रभु श्रीराम ने गंगा जी को पार करने के लिए केवट से नाव माँगी थी। आज उसी गंगा जी पर नावें बाँध दी जाती हैं — कभी त्योहार पर, कभी मेले पर, कभी वीआईपी आगमन पर, कभी सुरक्षा के नाम पर। जिस दिन घाट पर सबसे ज़्यादा भीड़ होती है, उसी दिन चप्पू रुक जाता है। नाव रुकती है तो चूल्हा रुकता है। सुरक्षा ज़रूरी है, पर रोज़गार भी उतना ही ज़रूरी है। नाव चलेगी तो घर चलेगा।
नीति वही, जहाँ न्याय हो। न्याय वहीं, जहाँ यात्री और रोज़गार दोनों सुरक्षित रहें।
जन से नीति, नीति से भारत।
जननीति भारत — अब होगी सुनवाई।