तुम कहो बेताबी, मैं "सुकून" लिख दूँ
तुम कहो आँखें, मैं तुम्हें "जुनून" लिख दूँ
तुम पूछो ठिकाना, मैं "दिल" का पता दे दूँ
तुम कहो अपना, मैं "दुनियाँ" को भुला दूँ
🌺🙏 नवरात्रि स्पेशल महानवमी भोग थाली 🙏🌺
माँ दुर्गा के चरणों में श्रद्धा और प्रेम से सजा महानवमी का पावन भोग। ❤️🌸 माता रानी सबके जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशियाँ भर दें। 🙏✨
जय माता दी! 🚩🌺
अभी माँ से खूब लडाई हुई हुआ ये बोली आज तुम्हारे यहाँ खाऊँगी मै बोली खिला दूँगी जब खाने को दी खाने को भात दाल और पनीर की सब्जी बनाई थी लेकिन वो बोली मुर्गा खाऊँगी जबकि मै नही खाती और मै नही बनाती माँ बोली दोबारा नही आऊँगी मै बोली आने की जरूरत नही
वासना शरीर से शुरू होती है और शरीर पर ही खत्म हो जाती है। इसलिए इसमें जल्दी ऊब आ जाती है। जिसे कल तक चाहते थे, आज उससे मन भर जाता है।
प्रेम आत्मा से शुरू होता है। शरीर तो उसका एक छोटा सा हिस्सा भर है। इसलिए प्रेम रोज गहरा होता है। ओशो कहते हैं, वासना में कल नहीं है, सिर्फ आज है।