EVM की ही बात कर लेते हैं।
हरियाणा के करनाल में पाँच EVM का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा। याचिका में EVM से छेड़छाड़ का मुद्दा उठाया गया और अंततः साढ़े चार साल बाद अदालत के फैसले से सरपंच बदल गया। जो उम्मीदवार पहले हारा हुआ घोषित किया गया था, उसे विजयी घोषित किया गया।
जब चुनावी नतीजे साढ़े चार साल बाद अदालत में बदल सकते हैं, तो EVM की विश्वसनीयता और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठना लाज़मी है।
लोकतंत्र में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए चुनावी प्रक्रिया का निष्पक्ष, पारदर्शी और संदेह से परे होना बेहद ज़रूरी है।