आरक्षण हटे या न हटे, इसपर चर्चा से क्यों भाग रहे?
कोई कह रहा कि लिखकर रख लो नहीं हटेगा, कोई गृहयुद्ध की धमकी दे रहा, कोई वही घिसी-पिटी 5000 साल पानी न पीने देने वाली कहानी लेकर आ रहा, कोई ललकार रहा कि सड़क पर उतरकर दिखाओ, कोई रीच के लिए लिख रहा कि कुछ नहीं होगा तो कोई सचमुच निराश है कि किसी राजनीतिक दल का समर्थन इस आंदोलन को नहीं मिलेगा।
लेकिन, मेरा प्रश्न केवल इतना है कि आओ चर्चा तो करो। बहस करो। साबित करो कि क्या जायज है या क्या नहीं। चर्चा से क्यों भागना, अगर तथ्य व तर्क हैं तुम्हारे तरकस में तो? चर्चा हो जाए, भारत शास्त्रार्थ की भूमि रही है।
सीधा फ़ैसला मत सुनाओ न, इसके पीछे तर्क दो। 4 फैक्ट्स बताओ। फ़िलहाल तो एटीट्यूड ऐसा है कि ग़लत है फिर भी जारी रहेगा, हटाकर दिखा दो दम है तो।