32 साल पहले, पापा ने चारमीनार से सद्भावना यात्रा की शुरुआत की थी। भारत की एकता और अखंडता के लिए उन्होंने अपनी जान की क़ुर्बानी दी थी।
सद्भावना मानवता का सबसे अनुपम मूल्य है। मैं, और कांग्रेस पार्टी, इसे किसी विभाजनकारी ताक़त के सामने टूटने नहीं देंगे।