कैसे आएगी?
तुम्हारा मालिक बेवक़ूफ़ी बंद ही नहीं कर रहा और तुम रीढ़विहीन चमचों को नेतृत्व तो मिलने से रहा! वो आलू से सोना, जलेबी की फैक्ट्री, अब्बा डब्बा चब्बा मुल्ला उसका अब्बा करता रहेगा, खांग्रेस चुनाव हारते रहेगी, तुम कल रेहान के टट्टे चाटोगे! क्योंकि चमचे तो चमचे ही हैं!