दो महिलाएं हैं...
- एक के कंधे पर संविधान है। दायित्व है। दायित्व के साथ जुड़ी संवैधानिक मर्यादा है। लोकसमीक्षा है। पीछे परिवार है। समाज है। हर सवाल का उत्तर देने के लिए अकेली है। छिपने के लिए भीड़ नहीं। बचाने के लिए प्रदर्शन नहीं। कल कोर्ट में अकेली खड़ी होगी।
- दूसरी का कंधा दायित्व विहीन है। पीछे परिवार नहीं। स्वयं मां-पिता पर बोझ है। साथ में गैर जिम्मेदार भीड़ है। हल्ला मचाने वाले पेड युट्यूबर्स हैं। देश-विदेश से फंड है। कोई जवाबदेही नहीं। छिपने के लिए भीड़ है। जवाब देने के लिए संसद से लेकर संयुक्त राष्ट्र तक लोग हैं बिरयानी है। ब्रा है। पैंटी है। इनसे कोई सवाल नहीं। कोई सृजन नहीं। कोई भविष्य नहीं। कोई सपना नहीं।
यदि एक के कंधे पर दायित्व ना हो तो दूसरी को पटक कर चढ़ बैठे! जबड़ा तोड़ दे। स्वयं के लिए नहीं, नागरिक समाज के लिए। राष्ट्र के लिए। आपके-हमारे बच्चो के सुरक्षित भविष्य के लिए।
पर हम-आप, यह शिक्षित समाज किस एक के लिए खड़ा है?
निर्णय आप स्वयं करें।
Oct 5, 2026 · 9:57 AM UTC
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