ज्ञानेश कुमार को कवर फायर देने के लिए दर्जनों पत्रकार एक्टिव हो गए हैं . सूत्रों के कंधे पर बंदूक़ रखकर चलाने में जुटे हैं . इन्हें ड्यूटी दी गई कि है कि इंडियन एक्सप्रेस के खुलासे को झूठा साबित करें . ज्ञानेश कुमार की मनमानी पर आपत्ति जताने वाले दोनों चुनाव आयुक्तों को झूठा साबित करें . चुनाव आयोग से इन्हें गुप्त मैसेज आ रहे हैं . ये सब आँख मूंदकर पूरे भक्ति भाव से ज्ञानेश ही सत्य है . बाकी सब मिथ्या है , ये नैरेटिव बनाने में लग गए हैं . चुनाव आयोग को अपनी बपौती समझकर चला रहे ज्ञानेश कुमार की पोल इस बार उनके ही सहयोगी चुनाव आयुक्तों ने खोली है . सूत्रों की दाल नहीं गलने वाली है .
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Replying to @ajitanjum
सुत्रों के अनुसार मिली खबर तथ्यपूर्ण नहीं होती। इसके आड़ में भ्रामक और तथ्यहीन विश्लेषण परोसें जाते हैं। ज्ञानेश लाख कोशिश कर लें अपने बेईमान चरित्र को धो नहीं पाएंगे।इनके पक्ष में जितने पत्रकार सक्रिय होना है हो जाएं,सभी अपने चेहरे पर कालिख ही मलेंगें। ज्ञानेश ने सत्ता के बल पर तमाम एकल फैसले किए, जिसे निरस्त किया जाना चाहिए।देश के लोकतंत्र को तबाह करने की कोशिश की, संविधान की धज्जियां उड़ाई, इसे सजा मिलनी चाहिए।इस पर देशद्रोह का मुकदमा चले और संविधान की हत्या करने के जुर्म में आजीवन कारावास हो।वह केवल इसी दंड का भागी हैं।

Sep 24, 2026 · 3:44 AM UTC

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