legal practitioner & social activities & rationalist, work for deprived people।।।।

Madhya Pradesh, India
किसी भी देश के नागरिक का सबसे बड़ा कर्तव्य! "सबसे बड़ी देशभक्ति देश को यह बताना है कि कब सरकार आपके साथ निचतापूर्ण,मूर्खतापूर्ण और दोषपूर्ण व्यवहार कर रही है।"
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पुलिस जितना क्रूर इस देश में कोई नहीं रहा है.. वीडियो में कथित तौर पर शुक्रवार रात हाफ़िज़पेट रेलवे स्टेशन के बाहर एक RPF कॉन्स्टेबल एक महिला को पीटते और उसके बाल पकड़कर घसीटते हुए दिख रहा है।
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यूपी के हाथरस में लगभग छह साल पहले एक 19 साल की दलित युवती खेतों में गंभीर हालत में मिली थी. 16 दिनों बाद उसकी अस्पताल में मौत हो गई. आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने आनन-फानन में उसके शव को गांव लाकर आधी रात में परिजनों की ग़ैर-मौजूदगी में जला दिया था. इतने साल बीत जाने के बाद भी इस परिवार के घर से सीआरपीएफ का पहरा नहीं हटा है. सुरक्षा का यही घेरा अब परिवार के लोगों के लिए क़ैद बन चुका है. पूरी रिपोर्ट देखिए: youtube.com/watch?v=t2xhvx0G… रिपोर्टः गौरव गुलमोहर शूट/एडिटः तेज बहादुर सिंह
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देखो चमन चुटिया मदचो-आरक्षणकाविरोध करनेवाले/भ्रष्टाचार करनेवालों केनाम देख लो/ इसी तरह सरकारी नौकरियों में भ्रष्टाचार करके मामाफूफाचाचाके बच्चे भर्ती करनेवाले इसी द्रोणाचार्यको रोकनेकेलिएआरक्षण का प्रावधानकिया गया है/देशकीआजादी १९९२ ओबीसीआरक्षणइन्हींबहनचोदोकेकारणलागू करनापड़ा।
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देखो मेरिट वालों जो कहते हैं की माइंस नंबर पाने वाले को नौकरी दी जा रही 93 नंबर वालों को नहीं वास्तव में तुम लोग हैं झूठ परोस रहे हो अजीत एमसी शुद्ध मूर्ख उसके चकलालस में मत पढ़ो अपने विवेक का उपयोग करो।
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जिन लोगों से SC ST और पिछड़ी का कटऑफ़ भी कभी जीवन मे पार नहीँ होता वो व्यक्ति सबसे ज्यादा आरक्षण का विरोधी होगा । अब आइये नौकरीयों मे कट ऑफ़ की बात कर लेते है | सवर्ण लोगो को ये भ्रम रहता है की जनरल वर्ग का चयनित नहीँ हुआ छात्र SC वर्ग के चयनित सभी वर्ग के छात्रों से काबिल रहता है, जबकि ऐसा नहीँ है । SC वर्ग का चयनित छात्र भी 90% बाकी छात्रों से तेज रहता है काबिल रहता है । उदाहरण के लिए अभी UPSI का फाइनल रिजल्ट आया था, करीब 15 लाख लड़को ने फार्म डाला था जिसमे 4500 बच्चे चयनित हुए । 15 लाख का 4500 होता है 0.30%, मतलब आधे प्रतिशत से भी कम । 99.70% बच्चे जिन्होंने फार्म डाला था वो चयनित नहीँ हुए । अब आते है फाइनल कट ऑफ़ पर, फाइनल कट ऑफ़ जनरल का 93%, ओबीसी और EWS दोनी का 92% करीब और SC का कट ऑफ़ 89% गया था । जनरल और SC मे सिर्फ 4% का अंतर है । अब फैक्ट ये है की 95% लोगों का 88% नम्बर नहीँ आया रहा होगा, यानी SC का जो चयनित बच्चा है वो बाकी ( 95 % अचयनित जिसमे जनरल ओबीसी SC सभी है ) से बेहतर है । इसी तरह UPSC मे हर साल 10-12 लाख फार्म पड़ते है, प्री मैंस इंटरव्यू के बाद फ़ाइनल रिजल्ट आता है, उसमे 95% लोग तो प्री मे ही बाहर हो जाते है बाकी लोग मैंस मे, फिर इंटरव्यू मे । पिछले साल UPSC मे जनरल का कट ऑफ़ 963, ओबीसी का 932, EWS का 926, और SC का 905 कट ऑफ़ था । हा ये बात सच है की SC का कट ऑफ़ जनरल से कम है और उसे कम रैंक पर भी अच्छी पोस्ट मिलेगी, लेकिन एक सच तो ये है की SC से चयनित बच्चा बाकी 95 % लोगों से बेहतर था, वरना बताइए 905 नम्बर लाना क्या आसान काम है? 95 % लोग तो 800 भी पार नहीँ हो पाते है । इसीलिए ये सोचना की SC से चयनित बच्चा किसी भी अचयनित जनरल वर्ग के बच्चे से कमजोर है मानसिक दिवालियापन है और कुछ नहीँ । आखिरी बात आरक्षण प्रतिनिधित्व का विषय है न कि आर्थिक मजबूती या नौकरी प्राप्त करने का, इसे अगर आप स्वीकार्य कर लेंगे तो बेहतर होगा, वैसे भी EWS आ जाने के बाद से आरक्षण पर बहस करना समय की बर्बादी ही है । 😊
मैं खुद UPPSC-PCS के कई एग्जाम दे चुकी हूँ… लेकिन आज आपके सामने खड़ी हूँ — कुछ भी नहीं हुआ! प्राइवेट जॉब कर रही हूँ। आरक्षण वाले कम मार्क्स लेकर अच्छी सरकारी नौकरी पा रहे हैं, और हम जनरल कैटेगरी वाले बाहर धूप में धक्के खा रहे हैं। मैं अकेली नहीं हूँ। बहुत सारे लोग हैं जो मेरे जैसे दर्द सह रहे हैं। इसी दर्द के कारण आज मैं यहाँ आई हूँ। PCS परीक्षा दी, आरक्षण के कारण कुछ नहीं हुआ!
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Justice Muralidhar warned that the concentration of wealth and political influence posed a challenge to India's democratic future Read more: barandbench.com/news/reassur…
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हेलो @Gork यह बताओ मनुवादियों के पास इतनी संपत्ति कहां से आई क्या ये मुगलों और अंग्रेजों सांठ गांठ करके भारतीय जनता का शोषण करके संपत्ति बनाई है।
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देख लो भारत देश की शिक्षा व्यवस्था क्यों बर्बाद हो गई है इसका मूल कारण है इन सब माननीय का होना
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मनुवादी यह चाहते हैं इस शिक्षा केंद्र का तो विश्व में सबसे बड़ा नाम होना चाहिए क्योंकि यहां पर सब मेरिट धारी है मैं इस तरह कम से कम भारत में या किसी एक जिले में 100 में से 98 स्कूल में दिखा सकता हूं तो भी कहेंगे आरक्षण से शिक्षा व्यवस्था बर्बाद हो गई साले यह नहीं रहती सैलरी लेकर
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आर्थिक आधार पर आरक्षण कैसा होगा? नीचे दिए गए सूची जैसा होगा👇 #ईडब्लूएस_आरक्षण_ध्वस्त_करो
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-नंबर लाकर SC/ST के लोग डॉक्टर बनते है? अरे नहीं जी...... SC वाला 97 नंबर ला रहा है। ST वाला 98 नंबर ला रहा है। अब EWS वाला सवर्ण मात्र 78 नंबर लाकर डॉक्टर बन रहा है। अब बताओ गलत इलाज करके पेट में कैची कौन छोड़ेगा? 😂
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ऐसा क्या करते हैं ब्राह्मण?
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. @BJP4Karnataka you are putting @RSSorg into an embarrassing situation by asking the right questions. If you ask about an organisation that has no formal legal existence, and naturally the answer is: “No.” No registration means no registered legal entity and when the organisation itself has no such formal legal identity, demanding records against the organisation while ignoring that distinction is either ignorance or sheer stupidity. Aren’t you fools aware? RSS is not a registered organisation. It does not even issue formal membership cards. So when individuals associated with it are accused of offences, cases are registered against those individuals. (Remember how you disowned Godse?) Is Bengaluru’s Keshava Krupa registered in the name of RSS? No. Is Delhi’s Keshav Kunj registered in the name of RSS? No. And that is precisely the issue. Influence without accountability. Assets without ownership in its own name. Members without formal membership. Power without accountability . That is why I am asking RSS to register itself, come within a transparent legal framework and disclose its accounts, assets, funding and liabilities. The questions @BJP4Karnataka should answer are simple: ◆ If RSS seeks to wield enormous influence over society, why is it so reluctant to register itself? ◆ Why the reluctance to submit itself to legal, financial and tax accountability? ◆ Why the secrecy surrounding who funds it and where that money comes from? And incidentally, there are cases including POCSO cases against individuals described or identified as RSS functionaries. So next time, ask the right question: “How many individuals associated with RSS or its affiliated organisations have criminal cases registered against them?” That list will take a long time to compile. But I will give it to you.
Imagine hating a patriotic organization so much, only to get publicly fact-checked by your OWN ministry! 💀 And the absolute cherry on the cake? IT WAS SIGNED BY HIM! 🤡 In reply to Council Q. 524, @PriyankKharge literally put his own signature on official paperwork confirming ZERO cases and ZERO untoward incidents against @RSSorg in Karnataka. Take the massive L and move on, #TrollMinister!
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कभी ऐसे थे हमारे @Profdilipmandal , केन्द्र की भाजपा सरकार की पोल खोलते हुए।
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महामना मदन मोहन मालवीय और डॉ अम्बेडकर जी के बीच 1931 को लंदन के गोलमेज सम्मेलन में तीखी नोक झोंक चल रही थी। विषय था सेपरेट इलेक्टोरल। सम्मेलन ब्रिटिश प्रधानमंत्री रैम्जे मैकडोनाल्ड की अध्यक्षता में हो रहा था और मदन मोहन मालवीय जी डॉ अम्बेडकर जी के किसी भी तर्क से सहमत, संतुष्ट नहीं हो रहे थे। जो भी डॉ अम्बेडकर कहते, मालवीय जी हर चीज़ को झुठला रहे थे। गाँधीजी के बदले इस सम्मेलन में मालवीय जी थे और मालवीय जी वही दोहराते जा रहे थे जो गाँधीजी रट लगाए रखते थे कि अछूत हमारे अभिन्न हिस्सा है। बीच सम्मेलन में अचानक मदन मोहन मालवीय जी खड़े हुए और कहने लगे हमारे धार्मिक मामलों में हम ब्रिटिश हुकूमत या किसी भी अन्य बाहरी लोगों का दखल नहीं चाहते हैं। जहां तक बात है डॉ अम्बेडकर की मांग का तो डॉ अम्बेडकर मेरे छोटे भाई हैं बात खत्म। डॉ अम्बेडकर जी से उनके समकालीन नेता कोई कभी जीत ही नहीं पाये और अम्बेडकर जी बिना समय गंवाए उठ खड़े हुये और सामने रखी पानी की बोतल से एक गिलास पानी भरा तथा मदन मोहन मालवीय जी तरफ़ बढ़ाते हुए कहा मालवीय जी आप मेरे बड़े भाई हो कृपया मेरे हाथों से यह पानी पी लीजिए। भरी महफ़िल में और ऐसे नाज़ुक और जरूरी मोड़ में मदन मोहन मालवीय जी अपने धर्म के आगे इतनी सी हिम्मत नहीं कर सके कि वह पानी पी लें। डॉ अम्बेडकर जी ने कहा कि मैँ दुनिया को बताना चाहता हूं कि यह कैसा भाईचारा जो एक भाई का छुआ पानी, दूसरा भाई पीने की हिम्मत नहीं कर सकता है? अपनी आत्मकथा में डॉक्टर अम्बेडकर जी ने लिखा है कि जब वे पढ़ते थे स्कूल में उनके लिए मटका छूना मना था। बड़ौदा रियासत में नौकरी करने गए, वहां पानी छूना मना था। जब डॉ अम्बेडकर प्रोफेसर बनकर पढ़ाने गये तब भी पानी छूना मना था और आज भी मना ही है। महाड़ आंदोलन से लेकर अबतक कुछ नहीं बदला। मेरे अपने गांव में आज 21 वीं सदी में भी यह परंपरा ज्यूँ की त्यों कायम है। इसके लिए धर्म को दोष कैसे न दूँ क्योंकि आस्था के नाम पर लोग गोमूत्र पी लेते हैं लेकिन वही आस्थावान लोग दलितों के हाथों से गंगाजल पीने की हिम्मत नहीं कर सकते हैं। यह शिक्षा धर्म की देन है अन्यथा मदन मोहन मालवीय जैसे धर्म के जानकार लोग यदि अम्बेडकर जी के हाथों एक घूंट पानी पीने की हिम्मत जुटा पाते तो आज बात कुछ और होती ( copy paste)
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प्रयागराज ➡यूपी APO भर्ती-2025 में आरक्षण का मामला ➡आरक्षण व्यवस्था के अनुपालन को लेकर दाखिल याचिका ➡इलाहाबाद HC में UPPSC ने दाखिल किया हलफनामा ➡प्री परीक्षा में जनरल सीट सिर्फ जनरल से भरी- आयोग ➡रिजर्व्ड कैटेगरी के अभ्यर्थी रिजर्व्ड कैटेगरी में ही क्वालीफाई हुए ➡हलफनामा दाखिल होने के बाद हाईकोर्ट में हुई बहस ➡25 अगस्त को 10 बजे मामले की अगली सुनवाई ➡पंकज वर्मा समेत 3 याचियों ने दाखिल की याचिका ➡अधिवक्ता अनुराग त्रिपाठी ने याचियों का पक्ष रखा #Prayagraj #UPPSC #UPNews
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किस हराम नस्ल या कुपढ़ को लगता है कि भारत में OBC आरक्षण लागू है? केंद्रीय सरकारी सेवाओं में OBC के लिए 27% आरक्षण है, लेकिन 1 जनवरी 2024 के सरकारी आंकड़ों में OBC की वास्तविक हिस्सेदारी Group-A में सिर्फ 19.14%, Group-B में 21.95% Group-C में 27.29% है। यानी OBC आरक्षण धरातल पर अभी लागू ही नहीं हुआ है। यदि 60% लोग 27% में सिमटा दिए गए हैं यह आरक्षण कैसे लागू हुआ?
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Anil ji kya lag raha hai Aarakshan hatao aandolan kaun si party karva rahi hai BJP RSS to nahin karva rahi hai hamen to lag raha hai Samajwadi party karva rahi hai... @AnilYadavmedia1
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Tumhen pata hai ki Nagar kinhi kaha jata hai main Rajasthan ghumne gaya tha to vahan ke sthaniya logon Ne kaha tha Nagar vah hai Jo aitihasik Kal mein rajya mein nagarvadhu ka karya karti thi unse Jo Putra paida hote se unhone Nagar ka title diye Gaye yah achcha Gya @NagarJitendr
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