क्या आपको सबसे पहले 8 मार्च का UGC आंदोलन याद है?
उस दिन लाखों लोग कई शहरों से दिल्ली के रामलीला मैदान पहुँचे थे, लेकिन आंदोलन एक दिन भी नहीं हो पाया।
वजह यह थी कि इस मादरणीय ढोंगी स्वामी
@kalisenachief के पास BJP के दफ़्तर से लाखों रुपये पहुँच चुके थे। जब हमें इस गद्दार के बारे में पता चला, तब से हमने इससे दूरी बना ली और फिर कभी इसका साथ नहीं दिया।
इनके कुछ शिष्य हैं, जिन्हें ये फ़ोन करके हम पर झूठे आरोप लगाने के लिए कहते हैं और उन्हें भी कुछ चिल्लर थमा देते हैं।
उमंग शर्मा उर्फ़
@GCMovementOrg
मादरणीय स्वामी जी के परमादरणीय शिष्य उमंग शर्मा ने अपने 6-8 अकाउंट बना रखे हैं। कुछ महीने पहले तक इन्हें “GC” शब्द भी पसंद नहीं था और ये Reservation Reform के नाम से अकाउंट चलाते थे। GC शब्द के लोकप्रिय होने के बाद इन्होंने अपने अकाउंट का नाम बदलकर GC रख लिया। इन्हें नेता बनना है और इसके लिए ये तरह-तरह के हथकंडे अपनाते हैं। जब BJP आईटी सेल UGC के खिलाफ आवाज़ उठाने पर हमें गालियाँ दे रही थी, तब ये उनका पूरा साथ दे रहे थे। इनके AAP से भी अच्छे संबंध रहे हैं। कल को ये अंबेडकरवादी हो जाएँ, तो भी कोई आश्चर्य नहीं होगा।
अनुभव गुप्ता (
@anubhavgupta_ji)
इन्हें सिर्फ़ पैसों से मतलब है। ये ख़ुद को GC एक्टिविस्ट कहते थे, फिर बिहार चुनाव में BJP के लिए पोस्ट करना शुरू कर दिया। अब 2-3 महीनों से ये वामपंथी बने हुए हैं। ऐसे कट्टर वामपंथी, जो हिंदू देवी-देवताओं को भी गाली देना शुरू कर चुके हैं। ये अब कॉक्रोच जनता पार्टी, सौरव दास और नेहा बोरा के कट्टर समर्थक हैं। पैसों के लिए ये कितनी भी नीचता कर सकते हैं।
माला पाठक (
@TruthAndVoice)
अगली मोहतरमा माला पाठक दिन में अपनी NGO चलाकर इंस्टाग्राम से लोगों को लूटती हैं और रातभर X पर स्पेस चलाकर लड़कों का दिल बहलाती हुई फ़ॉलोअर लूटती हैं। यहाँ नाम, फ़ोटो और प्रोफ़ेशन सब नक़ली हैं। इन्हें GC लीडर बनना है और सबसे बड़ा वाला।
अतुल राजपूत (
@atul_rajput05)
उमंग शर्मा का परम लूडो-ललित मित्र अतुल जिसकी IQ नेगेटिव में है। इसे सैटायर समझ नहीं आता और उसी को लेकर आरोप लगाना शुरू कर देता है। इसे YFE से दिक्कत इसलिए है क्योंकि उसके संस्थापक कौशल कांत मिश्रा अब BJP में हैं। जबकि कौशल कांत मिश्रा ने BJP में जाने से पहले YFE से इस्तीफ़ा दे दिया था।
इसने YFE का CIN: U85300MH2019NPL328290 बताया, लेकिन यह छुपा लिया कि 85300 का मतलब “Social Work Activities” है और NPL का मतलब “Not for Profit License” है। YFE ने अनेक राज्यों में आरक्षण, UGC और SC/ST के ख़िलाफ़ अनेकों केस लड़े हैं। लेकिन इसे फ़ेमस होने का ऐसा भूत चढ़ा हुआ है कि ये उस एकमात्र ऑर्गनाइज़ेशन के ख़िलाफ़ फ़ेक न्यूज़ फैला रहा है, जिसने कभी किसी पार्टी या सरकार का मुँह नहीं देखा चाहे BJP हो, Congress, SP, AAP या RJD और जो 20 सालों से लगातार GC हितों के लिए लड़ रही है।
ये सब एक साथ मिलकर
@neha_laldas जी को गालियाँ दे रहे हैं। उन्होंने लगातार 5-6 सालों से GC के लिए मेहनत की है। अंबेडकरवादियों से लड़ीं, कांग्रेस, बीजेपी, आप और सपा के आईटी सेल से लड़ते हुए आईं, आरक्षण, UGC, SC/ST एक्ट और अंबेडकरवादी नैरेटिव को फ़ैक्ट्स के साथ काउंटर किया, हर सरकार से सवाल किया, आर्टिकल लिखे, कोर्ट में केस लड़े, नेशनल टीवी डिबेट में हमारे मुद्दे उठाए, वीडियो बनाए, पॉडकास्ट किए और कभी ख़ुद के लिए पैसे नहीं माँगे। सबका साथ दिया।
आज सबकी ज़बान पर एक बात है कि हमने GC के तौर पर प्रगति की है। बात बिल्कुल सही है, लेकिन यह किसकी वजह से संभव हुआ?
इसमें सबसे बड़ी भूमिका नेहा जी की रही है।
यही सत्य है।
एक बुजुर्ग भगवाधारी हैं!
फोन करके बोलते थे मुझे प्रोमोट कर दो। हम सबकी बात उठाएंगे!
UGC टाइम में पता चला पार्टियों से पैसे खाये हैं तो हमने दूरी बना ली! ऐसे लोगो से दूरी अच्छी!
एक भाईसाहब हैं, ग्रुप में बोले GC शब्द use मत करो! फिर बोले हमी लीडर बनेंगे! फिर हमारे ग्रुप के चैट लीक किये, IT cell के साथ मिले, और GC activists खासकर महिलाओं को टारगेट किया! फिर आज GC activist बनके GC movement चलाने लगे, दिनरात खुद को GC नेता बताने लगे हैं!
एक भाईसाहब हैं, हमेशा हमारे साथ थे लेकिन ragebaiting करके रीच खाते थे! फिर उनको समझ आया कि दूसरे साइड ज़्यादा पैसा है! तो सोचे पैसा ज़्यादा कमाया जाए, तो रातोंरात पलट गए! अब दूसरी साइड में अम्बेडकवादी बन गए और GC activist को टारगेट करके वीडियो बनाने लगे!
एक मोहतरमा हैं, पता नहीं कौन हैं, नकली नाम के साथ अर्धरात्रि को स्पेस लगाकर लडकों का दिल बहलाती हैं, फिर दर्दभरी कहानियां सुनाकर कहती है जी असली GC एक्टविस्ट तो मैं ही हूँ, सब तो मैंने ही किया है!
एक और भाईसाहब हैं, जिनको कोई जानता भी नहीं, और जल्दी फेमस होना है तो सोचा चलो जो फेमस है उसको टारगेट कर लिया जाए!
अब ये सारे लोग झुंड बनाकर खुद को GC का शुभचिंतक बताकर, उस संस्था को टारगेट करने लगे हैं जो 20 सालों से हर कोर्ट में आरक्षण के खिलाफ केस लड़ी है!
क्यों?
क्योंकि यही तरीका है, जल्दी लोगों की नज़र में आने का और खुन्नस निकालने का की हमको लोग क्यों नहीं पूछते!
इनलोगों ने आजतक एक केस खुद नहीं किया, ना ही कोई GC के लिए काम किया! बस सबको चेहरा चमकाना है, जल्दी प्रसिद्धि पानी है ताकि कोई पार्टी खरीद ले और ज़्यादा माल बने!
बाकी जिसको इनलोगों के साथ चलना है, चलें!
बस हमें अपनी गंदी राजनीति से बाहर रखें!
धन्यवाद🙏