रिया गोस्वामी ने जाति की दीवारों और ब्राह्मणवादी पितृसत्तात्मक सोच को चुनौती देते हुए अपने प्रेमी मिलन पासवान के साथ विवाह किया ।
और अब अपने नए घर में आ चुकी है, रिया के प्रेमी मिलन के परिवार वालों ने रिया का जिस अपनापन और सम्मान के साथ स्वागत किया, वह बेहद खूबसूरत है। रिया का किसी रानी जैसे स्वागत किया गया।
लेकिन इस कहानी का दूसरा पहलू हमारी सामाजिक हकीकत भी दिखाता है।
चूंकि ये विवाह अंतर्जातीय के कारण रिया के घर वालों ने उससे रिश्ता तोड़ने तक का फैसला किया और कथित तौर पर उसके जीवित रहते ही उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया। यदि ऐसा केवल जाति के कारण हुआ है, तो यह सवाल सिर्फ एक परिवार से नहीं, बल्कि पूरी जातिवादी मानसिकता से है।
विडंबना देखिए हम सनातन और समान धर्म की बात करते हैं, लेकिन उसी धर्म के भीतर जाति के नाम पर इंसान को इंसान से छोटा-बड़ा मान लेते हैं।
प्रेम अगर दो बालिग इंसानों की सहमति और सम्मान पर आधारित है, तो जाति उसके रास्ते की दीवार क्यों बने?
रिया और मिलन को उनके नए जीवन के लिए ढेरों शुभकामनाएं।
उम्मीद है उनका रिश्ता सिर्फ दो दिलों को नहीं, बल्कि समाज में बनी कुछ पुरानी दीवारों को भी चुनौती देगा।