मुझे बार-बार इन उपद्रवियों ने परेशान किया. कई बार नाम और सरनेम बताने के बाद भी मेरा पूरा नाम पूछते रहे. इनका मकसद सिर्फ मेरी जाति जानना था. इस दौरान अगर साथी पत्रकार
@TanushreePande ने बीच में आकर हिम्मत नहीं दिखाई होती, तो मुझ पर हमला हो जाता. यह वीडियो तनुश्री ने ही रिकॉर्ड किया.
उस दिन कनॉट प्लेस में पुलिस की मौजूदगी में लाठियां चलीं. ‘स्वघोषित राष्ट्रवादी’ प्रदर्शनकारियों पर हमला करने के लिए पत्थर उठाते, उन्हें पीटते और पुलिस के हवाले करते दिखे. पत्रकार भी निशाने पर थे. पुलिस ने अपना सारा काम इन उपद्रवियों पर छोड़ दिया था. ये पुलिस के फ्रंट के तौर पर काम कर रहे थे. इनके तालमेल की हर तस्वीर हमारे कैमरे में कैद है.
यही नहीं पुलिस ने भी हमें काफी परेशान किया. पुलिस का पूरा जोर हमें वहां से खदेड़ने पर लगा रहा. जब अति हो गई और हालात हिंसक होने लगे, तब हम सामने आए.
पुलिस के बीच खड़ी एक कार में डंडे थे. मैं लगातार चिल्लाकर पुलिस से गाड़ी की जांच करने को कहता रहा, लेकिन पुलिस ने एक नहीं सुनी और भीड़ के बीच से कार को घेरा बनाकर सुरक्षित निकाल दिया. बाद में पुलिस ने दावा किया कि गाड़ी की जांच में कुछ नहीं मिला. लेकिन न्यूज़लॉन्ड्री की रिपोर्ट में कार से डंडे निकाले जाने के दृश्य और सबूत मौजूद हैं.
अब जब सारे सबूत सामने हैं, तो दिल्ली पुलिस बताए कि प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों पर हमला करने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई?
जब मौके पर पुलिस मौजूद थी, तो इन लोगों को हिंसा करने और पत्रकारों को घेरने की छूट कैसे मिली?
पुलिस बल और इन उपद्रवियों के बीच दिखे तालमेल की जांच होगी या नहीं? जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर क्या कार्रवाई होगी?
दिल्ली पुलिस को
@newslaundry की यह रिपोर्ट देखनी चाहिए और इन सवालों के जवाब सार्वजनिक करने चाहिए. वर्दी की मौजूदगी में कानून हाथ में लेने वालों को खुली छूट क्यों मिली? जवाबदेही तय होनी चाहिए.
पूरी रिपोर्ट-
youtu.be/3E9zuuSe-oA?si=7yND…