भारत में ना कोई स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनी है जबकि भारत विश्व में सबसे बड़ा स्मार्टफ़ोन यूजर है।
कोई AI ऐप भारत नहीं बना पाया है।
कोई भारत का सोशल मीडिया प्लेटफार्म नहीं है जबकि भारत सोशल मीडिया यूजर का सबसे बड़ा बाज़ार है।
टेक्नोलॉजी के मामले में भारत में कुछ भी नया नहीं हो रहा।
इलेक्शन आते हैं तो विश्वगुरु बनने की फ़र्ज़ी चटनी चटायी जाती है।
SC ST एक्ट अवैध धन उगाही का धंधा बन चुका है।
इस कानून की ब्लैकमेलिंग की वजह से आए दिन सवर्ण लोग अपनी जान दे रहे हैं।
सरकार सो रही है।
इन सवर्णों के डेथ वारंट पर 2018 में मोदी ने साइन किए थे।
बिना जांच किसी को भी झूठे केस में प्रताड़ित इसी राम राज्य के सपने दिखाकर सरकार बनायी थी।
Supreme Court of India is some time very strange.
They fail to understand a simple point: how can a 22-year- youth compete with a 30-year old man ?
After all, if a candidate from a reserved category (Ahir/Jatav) can appear for an exam until the age of 30, while a General category candidate cannot appear after 25, on what basis are you allowing a 30-year-old candidate to give seat in the General category?"
Why do you so afraid of rserved people ,is it fear of their majority ?
#SupremeCourt#AllahabadHighCourt
इस जातिवादी आतंकी को डिटेन किया गया है जिसने खुलेआम सवर्णों के नरसंहार की धमकियाँ दी हैं।
ऐसे लोगों पर UAPA लगाना चाहिए और इसे लोगों पर आजीवन चुनाव लड़ने पर भी पाबंदी लगानी चाहिए।
अगर इनको रोका नहीं गया तो ये लोग भारत में गृहयुद्ध करवा देंगे।
BJP को तुष्टिकरण की राजनीति से ऊपर उठकर देशहित में सोचना चाहिए।
पहले छोटी बच्ची के साथ दलित टीचर ने घिनौनी हरकत की और उसके बाद उल्टा पीड़िता के परिवार को फ़र्ज़ी SC ST एक्ट में फँसाने की धमकी दी।
मोदी जी के शोषित वंचित बलात्कारी मानसिकता के लोग जो SC ST एक्ट को ढाल बना कर रोज़ नए नए कुकर्म कर रहे हैं।
अभिनव पांडेय को अधेड़ उम्र में जेंजी बनने का शौक चढ़ा था। धड़ाधड़ फॉलोअर्स बढ़ रहे थे। मजा आ रहा था।
अब पेले जा रहे हैं तो मुँह छिपा कर भागे भागे घूम रहे हैं।
पत्रकारिता के नाम पर दलाली करोगे तो बेइज़्ज़ती सहनी होगी।
सामान्य वर्ग का रिजल्ट कम होने की वजह है सामान्य वर्ग की फॉर्म भरने में उम्र कम होना।
सामान्य वर्ग का बच्चा 22,23 साल की उम्र के बाद रेस से बाहर हो जाएगा वहीं तथाकथित वंचित वर्ग 30 की उम्र में भी एग्जाम देगा।
EWS में भी उम्र छूट नहीं है।
अब थानों में 5 सिपाही में बस एक ब्राह्मण,राजपूत आदि होगा।
थाने स्तर पर जातिवाद किसी से छिपा नहीं है।
सवर्णों को मुख्यधारा से समाप्ति का सबूत है यह परीक्षा परिणाम!
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भाजपा सरकारें 50% से अधिक आरक्षण के लिए लगातार प्रयासरत हैं। सवर्णों का क्या है, घास छीलना सीख सकते हैं।
विकसित भारत 2047में होगा, अंतरिक्ष में कदम रखेंगे, भीमयान बनाएंगे और निर्वात में बिना किसी ठेथर के टहलने निकल जाएंगे।
उस गरीब सवर्ण बेटी की मजबूरी देखिए कि उसको उस रिसोर्ट में काम करते हुए डर लगता था पर फिर भी उसकी मजबूरी पर तरस नहीं आया।
वो VIP आज मोदी कृपा से VVIP बन चुका है।
दलित,शोषित,वंचित होने का इनाम मिला है!
मोदी के अनुसार तो बदला लिया होगा!