कोई भी यह चर्चा करने को तैयार नहीं कि सत्तर वर्षों में किस जाति समूह को क्या लाभ मिला, किसका उत्थान हुआ, ओबीसी किस आधार आरक्षण ले रहा है जबकि उसमें जो डोमिनेंट जातियाँ हैं वो स्वयं को क्षत्रिय और राजाओं का वंशज भी कहती है। इनका पानी किसने रोक लिया था भाई?
अब चर्चा तो होगी, और जितनी होनी चाहिए उससे अधिक होगी। हाँ, राम मंदिर के चंदा चोरों को बचाने के लिए कॉकरोच के सामने लेटने वाले लोगों को इससे समस्या होनी भी चाहिए।