संतोष वर्मा जैसे लोग IAS बन जाएँ या कुछ भी बन जाएँ, यदि सोच ऐसी रहेगी तो पद की गरिमा नहीं बचेगी। एक टॉप IAS अधिकारी पब्लिकली उपलब्ध वीडियो में ऐसा कैसे बोल सकता है?
मुझे यह समझ नहीं आता कि हर उदाहरण में "ब्राह्मण की बेटी" ही क्यों आ जाती है? स्टेज से खुल्लम-खुल्ला कहा जा रहा है कि ब्राह्मण बेटी दान कर दे या संबंध बना ले। कौन सा संबंध?
ऐसे बयान उसी मानसिकता वाले हजारों लोगों को embolden करते हैं। ब्राह्मणों के नाम पर रेप थ्रेट्स और ऐसी बातें लिखी जा रही हैं जिन्हें दोहराया भी नहीं जा सकता, ब्राह्मण लड़कियों के कमेंट बॉक्स में जाकर देख लीजिए।
सरकार, न्यायपालिका, किसी को कुछ नहीं दिखता। हमारे जैसे लोगों पर रैंडम जगहों पर FIR हो जाती हैं, कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट के केस चलते हैं, और इनके लिए कुछ नहीं?
रोटी-बेटी का संबंध ऐसे बयानों से नहीं, योग्यता से बनता है। जाटव हो, पासवान हो, वाल्मीकि हो, किसी भी जाति समूह से आते हों, यदि लड़के बढ़िया काम कर रहे हैं, well-mannered हैं और लड़की को उनमें योग्यता दिखती है, तो क्या अंतरजातीय विवाह नहीं हो रहे?
यह वीडियो 26 नवम्बर, 2025 के live वीडियो का एक अंश है।