अब यह मत कहना कि यह कोर्ट का डिसीजन था.. कोर्ट का डिसीजन रिजर्वेशन के मामले में क्रीमी लेयर लगाने का भी था.. पर हमारी सरकार ने उसकी ना कर दिया.. और कहां की रिजर्वेशन लेना उन लोगों का मौलिक अधिकार है.. तो यह बात तो बिल्कुल नहीं है कि यह कोर्ट का डिसीजन था 👇
🚨 राष्ट्रीय सुरक्षा से ऐसा खिलवाड़ क्यों? म्यांमार ट्रेनिंग कैंप मामले में NIA की भारी नाकामी!
यह बेहद शर्मनाक और हैरान करने वाला है कि दिल्ली की विशेष NIA अदालत को 1 अमेरिकी और 6 यूक्रेनी नागरिकों को मजबूरन 'डिफॉल्ट जमानत' देनी पड़ी!
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) जैसी शीर्ष संस्था आखिर 180 दिनों की अनिवार्य समय-सीमा के भीतर UAPA के तहत आतंकवाद संबंधी आरोप पत्र (Charge Sheet) दाखिल करने में कैसे विफल हो गई?
सिर्फ इमिग्रेशन और वीज़ा उल्लंघन की ढीली चार्जशीट पेश करने का नतीजा यह हुआ कि आतंकवाद के संदिग्धों को भारतीय कानून के तहत तकनीकी आधार पर जमानत का हक मिल गया।
मार्च 2026 में गिरफ्तार इन विदेशी नागरिकों को अब तिहाड़ जेल से रिहा कर, पासपोर्ट सौंपकर 1 महीने के लिए विदेश जाने की इजाजत भी दे दी गई है। विपक्ष का इसे केंद्रीय एजेंसियों की रणनीतिक विफलता और घोर लापरवाही कहना बिल्कुल जायज है।
जब मामला देश की सुरक्षा और म्यांमार जैसे संवेदनशील ट्रेनिंग कैंपों से जुड़ा हो, तब ऐसी प्रक्रियात्मक चूक कतई बर्दाश्त नहीं की जा सकती!
NIA भले ही कह रही है कि जांच अभी जारी है, लेकिन यह ढीला रवैया न्याय प्रणाली पर एक बड़ा धब्बा है। अंत का इंतज़ार कीजिए... देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले जवाबदेह अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए!
सरकार इस हद तक गिर जाएगी मुझे पता ही नहीं था.. एक आतंकवादी तक को बेल दी गई..... अंधा कानून शायद इसी को कहते हैं 👇