लोकतंत्र में हर पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में होना जितना आवश्यक है, उतना ही आवश्यक यह भी है कि सूची सही, विश्वसनीय और अद्यतन हो।
मृत व्यक्तियों के नाम, स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके लोगों के नाम, दो स्थानों की मतदाता सूचियों में दर्ज नाम अथवा दूसरे देश के नागरिकों के नाम हटाने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) जरूरी है। किसी पात्र मतदाता का नाम न छूटे, इसके लिए प्रक्रिया में व्यवस्था की गई है।
मतदाता सूची की शुचिता पर राजनीति नहीं, पारदर्शिता और विश्वसनीयता आवश्यक है। निर्वाचन आयोग द्वारा कराया जा रहा SIR इसी दिशा में एक जरूरी कदम है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने भी माना है कि मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करना आयोग के संवैधानिक दायित्व का हिस्सा है।
शुद्ध मतदाता सूची लोकतंत्र की आत्मा है।
जो व्यक्ति इस दुनिया में नहीं है, उसका नाम मतदाता सूची में क्यों रहे?
जो व्यक्ति किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित हो चुका है उसका नाम पुराने स्थान पर क्यों रहे?
एक ही व्यक्ति का नाम दो जगह क्यों हो?
और जो भारत का नागरिक ही नहीं है, उसका नाम भारतीय मतदाता सूची में क्यों हो?
S.I.R. इसी मतदाता सूची को शुद्ध और पारदर्शी बनाने की प्रक्रिया है। पात्र मतदाता का नाम किसी भी स्थिति में न छूटे और अपात्र नाम सूची से हटें; यही स्वस्थ लोकतंत्र की आवश्यकता है।