सवर्ण समाज जरूर सुने... मोदी ने किस प्रकार से सवर्णों को बर्बाद करने के लिए SCST एक्ट (मोदी एक्ट/ को मजबूत किया है उसका बयान सुनिए... पूरा खून खौल उठेगा।
2015 में SC/ST एक्ट को और सख्त किया। जो अपराध 22 थे, उन्हें बढ़ाकर 47 कर दिए। मोदी एक्ट के अनुसार दलित-आदिवासी को कैसी भाषा सुनाई जाती है, क्या डर होता है — वो सब खोज-खोजकर कानून में डाल दिया, ताकि उन्हें “सम्मानपूर्वक जीने का कानूनी अवसर” मिले।
यानी उत्थान की बात नहीं, डर की बात है। सम्मान का दावा कानून के डंडे से। जिस समाज को हर चुनाव में वोट बैंक माना जाता है, उसी के नाम पर एक्ट को इतना चौड़ा किया गया कि अब शिकायत ही सजा बन सकती है। गवाह, इरादा, प्रारंभिक जाँच — सब ढीला। आरोपी की सुनवाई बाद में।
मोदी का संदेश सीधा है: यह कानून जानबूझकर कड़ा किया गया है। सवर्ण समाज इसे “सामाजिक न्याय” समझकर चुप रहे, या यह समझे कि सरकार ने खुद स्वीकार किया है — 22 से 47 का विस्तार सहानुभूति नहीं, राजनीतिक गणना थी।
कानून अत्याचार रोके, यह सही है। कानून को हथियार बनाए, यह अन्याय है। फर्क दोनों में है। मोदी ने फर्क मिटा दिया।