जब मैं अपने अंतिम शब्द लिखूंगी,
ईश्वर को नई किरण का रूप लिखूंगी, रिश्तों को आत्मीय बंधन लिखूँगी , प्रेम को स्वाभाविक लिखूँगी।
सुख को संतुष्टि लिखूँगी, दुःख को कर्म फल लिखूँगी।
और स्वयं को अध्यात्मिक रूप, जो एक मानवीय जीवन को समझने का जीवन पर्यन्त प्रयत्न करेगा , लिखूँगी.! 😊
जब मैं अपने अन्तिम शब्द लिखूँगी..
ईश्वर को पाषाण लिखूँगी, रिश्तों को बेड़ियाँ लिखूँगी, प्रेम को पाखंड लिखूँगी...,
सुख को भ्रम लिखूँगी, दुख को सत्य लिखूँगी...
और स्वयँ को पीड़ा लिखूँगी...!