भाई ये क्या तरीका है, मतलब उस बहन को ही शर्म आई, उसने पैर खींच लिए।
लेकिन सामने वाले को रत्ती भर भी शर्म नहीं आई कि भाई-बहन का पवित्र रिश्ता क्या होता है।
विपक्ष में हैं, 99 सांसद हैं, सहयोगी दल हैं। संसद में सवाल उठाइए, सरकार को घेरिए, अपने मुद्दे तर्क के साथ रखिए। नैतिक और लोकतांत्रिक तरीका यही है।
उदंड और अनैतिक आचरण से किसी और की नहीं, अपनी ही राजनीतिक साख गिरती है।
कभी-कभी लगता है, या तो इन्हें राजनीति के नियम-कायदे समझ नहीं आए, या फिर मुद्दे तर्क और प्रक्रिया की कसौटी पर टिक नहीं रहे।
इसलिए कैमरों के सामने हंगामा, फिर उसी हंगामे से सहानुभूति बटोरने की कोशिश!
मुद्दा कमजोर हो तो तमाशा बड़ा करने से सत्य मजबूत नहीं हो जाता। 😂