क्या ही माँग लिया हमने?
ना Free Electricity माँगी,
ना Free Bus Ride माँगी,
ना किसी Scheme का पैसा माँगा,
ना Free Ration की फ़रियाद की…
हमने तो बस थोड़ा सा TIME माँगा था।
क्योंकि हमें Free कुछ नहीं चाहिए,
हमें तो अपना काम ईमानदारी से करना है।
वादे दूसरों से होते रहे,
Deadlines हमारे हिस्से आती रहीं…
राहत कहीं और बाँटी जाती रही,
और Professionals रातों में जागते रहे।
अजीब दस्तूर है साहब
हमने ख़ज़ाना नहीं माँगा था,
सिर्फ़ इतना वक़्त माँगा था
कि काम जल्दी नहीं… सही कर सकें।
राजा कहता है
“मुफ़्त की कोई सौग़ात नहीं चाहिए,
बस मेहनत के साथ थोड़ा वक़्त चाहिए;
Quality की उम्मीद पूरी रखिए हुज़ूर,
तो Deadline में भी थोड़ा इंसाफ़ चाहिए।”