पीड़ीत की पाद और कब्जियत का पिंपल
एक व्यक्ति था। उसकी विशेषता यह थी कि वह जहाँ बैठता था, वहाँ भयंकर दुर्गन्ध उत्पन्न करता था। इस गंध का कारण उसकी कब्जियत थी जो कम पानी पीने से हुआ करती थी। कहते हैं जल के अभाव में केवल सूखे से काम चलाता था।
हालाँकि, यह कोई अच्छी बात तो थी नहीं पर वह जब भी उग्र होता तो कहीं बैनर टाँग कर बैठ जाता और माइक पर कहने लगता था: हमारे पूर्वज बहुत बड़े पदक्कड़ थे, ऐसा पादते थे कि गंध गेटवे ऑफ इंडिया तक जाती थी। हम उसी के बेटे हैं, उँगली डाल कर पाद निकाल देंगे और तुम सबको यूरेशिया भागना पड़ेगा।
लोग पहले उसे इग्नोर करते रहे कि भाई पानी ठीक से पीया कर, चेहरे के पिंपल सही हो जाएँगे, पाद कम निकलेगी लेकिन वो तो पाद को हथियार बनाए घूमता था। वही धमकी कि उँगली डाल कर पाद लूँगा…
फिर किसी दिन माइक ले कर वो अपने पाद-शक्ति की धमकी दे रहा था। तभी एक व्यक्ति आया जो उसकी धमकी से पक चुका था, उसने माइक 🎤 छीन कर, उसकी तार खींच कर निकाल दी और पतले सिरे से भीतर ठोक दिया।
कहा जाता है कि अब पादना तो बंद हो गया है, पर डकार अधिक आती है।