कुछ जगहें सिर्फ जगहें नहीं होतीं… वे हमारी यादों का हिस्सा बन जाती हैं।
मिहिर जोशी की ‘बरामदे’ ऐसी ही कहानियों की किताब है, जहाँ बचपन, परिवार, दोस्त, पड़ोसी, पहला प्यार और बड़े होने की छोटी-छोटी उलझनें साथ चलती हैं। पढ़ते हुए कभी मुस्कान आती है, तो कभी अपने बीते दिनों की याद।