Indian || Socialist || Secular

Uttar Pradesh , india
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में ओवैसी जी इतने सक्रिय हैं, लगातार जनसभाएं कर रहे हैं। आखिर ओवैसी जी के पास इतना पैसा आ कहाँ से रहा है? @grok , कहीं बीजेपी ही तो पर्दे के पीछे से इनकी मदद नहीं कर रही है?
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ये भारत के सबसे बड़े प्रदेश के मुख्यमंत्री की भाषा है। शायद ऐसी भाषा बोलते हुए इन्हें आनंद की अनुभूति होती होगी। उत्तर प्रदेश की जनता का दुर्भाग्य है कि ऐसे नफरती लोगों को झेलना रहे हैं। वैसे, इनका आधा काम तो ओवैसी जी खुद ही कर रहे हैं, तो दूसरों को क्या कहें!
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अखिलेश यादव जी की ये बात खासकर पिछड़े, दलित और मुस्लिम समाज के लोगों जरूर सुनना चाहिए बहुत बड़ी बात बोले हैं अखिलेश यादव जी! यूपी के मुख्यमंत्री हों या देश के प्रधानमंत्री, दोनों वही कर रहे हैं।
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अखिलेश यादव जी ने PDA का सिर्फ नारा नहीं दिया, बल्कि जरूरतमंद PDA परिवारों को सहारा भी दिया। सोचो, जो इंसान बिना सरकार में रहे ही रोज किसी न किसी की मदद कर रहा है, अगर वह इंसान सरकार में आ जाएगा तो कितनी मदद करेगा! आज सपा कार्यालय में अखिलेश यादव जी ने गरीब PDA परिवारों को PDA भवन की चाबी दी। जया पाल सयानी पासवान सुमित्रा निषाद अलीमून निशा चंपा भारती सोचो, आज ये लोग कितने खुश होंगे! इनके चेहरों पर कितनी मुस्कान होगी। 2027 से अखिलेश यादव जी की वजह से यूपी की जनता के चेहरों पर खुशियां होंगी।
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जाति की राजनीति दोधारी तलवार है, तो BJP की राजनीति कौन-सी तलवार है? और सपा और RJD का जनाधार सिर्फ यादव-मुस्लिम तक सीमित नहीं है, बल्कि हर जाति और धर्म के लोग इन पार्टियों को अपना समर्थन देते हैं। बिहार में भाजपा की चाल में उलझकर मुस्लिम वोटों का एक हिस्सा ओवैसी की तरफ चला गया था। इसलिए बिहार का नतीजा देखने के बाद यूपी के मुसलमान समझ गए है कि ओवैसी को वोट देना बीजेपी को देने के बराबर है।
जाति की राजनीति 2 धारी तलवार होती है UP-बिहार की राजनीति में जिस मुस्लिम-यादव समीकरण ने सपा और RJD को जीत दिलाई वही समीकरण अब इनके गले की फाँस बन चुका है असदुद्दीन ओवैसी अब खुलकर यादव-मुस्लिम समीकरण की सच्चाई बता रहे हैं……..RJD प्रवक्ताओं ने हिंदू समाज में जो नफरत का जहर बोया नतीजन उन्हें समाज ने अस्वीकार कर दिया, मुस्लिम ओवैसी के साथ गया…… UP में क्या होगा?
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बसपा के नेता समझ गए हैं कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बसपा के हालात क्या होने वाली है। लेकिन बसपा के लोग पता नहीं किस मुंह से कह रहे हैं कि मायावती जी मुख्यमंत्री बनेंगी! आज बसपा के नेता दारा सिंह प्रजापति अपने सैकड़ों साथियों के साथ समाजवादी पार्टी में शामिल होंगे। दारा सिंह प्रजापति इससे पहले मुजफ्फरनगर से बसपा के लोकसभा प्रत्याशी थे लेकिन 2027 से पहले ही उन्हें हवा के रुख का अंदाजा हो गया है इसलिए बसपा का साथ छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिए है।
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उत्तर प्रदेश में बीजेपी ओवैसी जी को वही रैलियां करने भेज रही है, जहां समाजवादी पार्टी मजबूत स्थिति में है। अक्टूबर 2026 में ओवैसी जी ने चार जिलों में अपनी जनसभाएं की हैं। १- आजमगढ़ (11 अक्टूबर 2026) २- श्रावस्ती (4 अक्टूबर 2026) ३- रामपुर ४- शामली (कैराना) (25 अक्टूबर 2026) आइए, आपको कुछ ठोस उदाहरणों से समझाते हैं। इन्हें देखने के बाद आप खुद ओवैसी जी को बीजेपी की B-Team कहने लगेगे। आजमगढ़ में समाजवादी पार्टी ने 10 की 10 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की थी। शामली में 3 विधानसभा सीटों में समाजवादी पार्टी ने 1 सीट और उसकी गठबंधन सहयोगी RLD ने 2 सीटें जीती थीं। श्रावस्ती में 2 विधानसभा सीटों में समाजवादी पार्टी ने 1 सीट जीती थी और दूसरी सीट पर कड़ी टक्कर थी। रामपुर में 5 विधानसभा सीटों में समाजवादी पार्टी ने 3 सीटें जीती थीं।
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रावण वेश बदलकर भगवान श्रीराम के साथ छल करने आया था। और ओवैसी जी वेश बदलकर मुसलमानों के साथ छल करने आए हैं। मुसलमान भाई जितनी जल्दी इस बात को समझ जाएंगे, उनके लिए उतना ही अच्छा रहेगा।
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कुछ पिछड़े, दलित और मुस्लिम भाई, जो बसपा, AIMIM और अन्य पार्टियों के साथ हैं, उनसे एक बात कहना चाहता हूँ। ग्राउंड रिपोर्ट बता रही है कि इस बार उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की मजबूत स्थिति है। हम आपको इसलिए पहले बता रहे हैं, ताकि चुनाव के बाद फिर पाँच साल तक रोना न पड़े। सबसे ज्यादा तुम्हीं सब रोते हो, कोई महंगाई की मार से, कोई बेरोजगारी की मार से, तो कोई बुलडोजर की मार से। जो पार्टी बीजेपी को हरा रही है, चुनाव के समय उसका साथ दो, वरना बाद में पछताने के अलावा कुछ नहीं बचेगा।
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कलयुग के रावण जी भी ग़ज़ब हैं। नगीना की सीट जीतने में हालत खराब हो गई थी और घमंड ऐसे कर रहे हैं जैसे पाँच-छह राज्यों में इनकी पार्टी की सरकार हो। अखिलेश यादव जी को पता है कि चंद्रशेखर रावण जी जैसे लोग अवसरवादी हैं। समाजवादी पार्टी से गठबंधन करके जीत तो जाएंगे, लेकिन लास्ट में भागकर बीजेपी के ही पाले में जाएंगे। ऐसे लोगों का क्या विश्वास! PDA के लोग जैसे एकजुट हैं, अगर ऐसे ही रहे तो समाजवादी पार्टी की पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने से कोई नहीं रोक सकता।
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जिस नेता ने ये पोस्टर लगवाया है, उसने न तो अपना नाम लिखा और न ही अपनी फोटो लगाई! कहीं ऐसा तो नहीं कि बीजेपी ने ही ये पोस्टर लगवाया हो, ताकि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच मतभेद पैदा किए जा सकें? बीजेपी बहुत चालबाज पार्टी है, सत्ता के लिए वो कुछ भी कर सकती है। खैर, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के गठबंधन में कांग्रेस को कितनी सीटें देनी हैं, ये तो अखिलेश यादव जी तय करेंगे। छुटभैया नेताओं के कुछ भी बोलने से कोई फर्क नहीं पड़ता। गठबंधन का फैसला बड़े नेता करेंगे, न कि छुटभैया नेता!
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बसपा और AIMIM को वोट देने वालों, आँख खोलकर देख लो कि उत्तर प्रदेश में इन दोनों पार्टियों का क्या हाल है। इन दोनों पार्टियों का हाल 2027 में भी यही रहेगा। इसका कारण है कि ये लोग केवल चुनाव के समय ही दिखाई देते हैं। अगर बीजेपी को हराना चाहते हैं, तो मायावती जी और ओवैसी जी को वोट देकर अपना वोट खराब मत करो। ये लोग हर सीट पर 10 से 20 हजार वोट लेकर खुद तो जीतते नहीं हैं, बल्कि बीजेपी को फायदा जरूर पहुँचा देते हैं। अगर बीजेपी को हराना है, तो समाजवादी पार्टी का सहयोग करो। नहीं तो आप सबकी मर्जी है, अगले पाँच साल बुलडोजर, बेरोजगारी और महंगाई की मार झेलने के लिए तैयार रहो।
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ये बुलडोजर पिछड़ों, दलितों और मुस्लिमों को गौर से देखना चाहिए, क्योंकि इसी बुलडोजर से सबसे ज्यादा परेशान इन्हीं लोगों को किया गया है। हम हमेशा से कहते आ रहे हैं और फिर कह रहे हैं कि पिछड़े, दलित और मुस्लिम एकजुट हो जाइए। मायावती जी और ओवैसी जी के बहकावे में मत आइए। एक तरफ गरीब बेटियों का भविष्य संवर रहा था, तो दूसरी तरफ बुलडोजर से उसे कुचला जा रहा था। सोचो समाजवादी पार्टी के साइकिल वितरण कार्यक्रम के स्थल को इस तानाशाही सरकार ने बुलडोजर चलवाकर तहस-नहस करवा दिया है। ये साइकिलें गरीब घरों की बेटियों को दी जानी थीं, लेकिन सरकार को गरीबों का भला होना अच्छा नहीं लगा। इसलिए समय रहते एकजुट हो जाइए और अपने हक़ की लड़ाई लड़िए।
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2022 विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और बीजेपी की तगड़ी फाइट थी। हर सीट पर समाजवादी पार्टी ने बीजेपी को कड़ी टक्कर दी थी। 70 सीटें ऐसी थीं, जहाँ समाजवादी पार्टी 10,000 वोटों से कम अंतर से हारी थी। हम PDA वालों को इसलिए कह रहे हैं कि बीजेपी जैसी तानाशाही सरकार को हराना है, तो एकजुट हो जाइए। बसपा और AIMIM के चक्कर में पड़ेंगे, तो 2027 में भी यही हाल होगा। इसलिए मायावती जी और ओवैसी जी के बहकावे में आकर अपना वोट खराब मत करो। समाजवादी पार्टी का साथ दो।
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कल समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं ने हर बूथ पर वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने और सुधार करवाने के लिए मुस्तैदी से काम किया। समाजवादी पार्टी PDA के वोटरों के लिए परेशान है और उनका वोट न कटने पाए, इसलिए तानाशाही सरकार से लड़ रही है। जबकि विपक्ष की कुछ पार्टियां आराम से बैठकर सिर्फ चुनाव की तारीख का इंतजार कर रही हैं। PDA के लोग देख रहे हैं कि कौन उनके लिए परेशान है और कौन सिर्फ उनका वोट लेना चाहता है।
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यूपी की जनता और नेताओं को अच्छी तरह से पता चल गया है कि 2027 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने जा रही है। इसलिए भाजपा और बसपा का दामन छोड़कर लोग समाजवादी पार्टी से जुड़ने लगे हैं। कभी मायावती जी के करीबी माने जाने वाले IAS रामबहादुर जी 26 अक्टूबर को समाजवादी पार्टी में शामिल होने जा रहे हैं। रामबहादुर जी 2017 के विधानसभा चुनाव में बसपा के टिकट पर चुनाव भी लड़ चुके हैं।
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बीजेपी की नई चाल देखिए! ओवैसी जी और चंद्रशेखर रावण जी की पार्टी के बीच गठबंधन करवाया जा रहा है। आइए बताते हैं, इस चाल का मकसद क्या है। बीजेपी अच्छी तरह जानती है कि ओवैसी जी और चंद्रशेखर रावण जी अगर अकेले चुनाव लड़ेंगे, तो जनता उन्हें वोट देने से पहले सोचेगी कि जब ये जीत ही नहीं पाएंगे, तो इन्हें वोट देने का क्या फायदा? मायावती जी की पार्टी पहले से ही कमजोर स्थिति में है। ऐसे में ओवैसी जी और चंद्रशेखर रावण जी का गठबंधन करवाकर बीजेपी चाहती है कि मुस्लिम और दलित वोट समाजवादी पार्टी की तरफ जाने के बजाय इस गठबंधन की तरफ चले जाएं। क्योंकि अगर हर सीट पर कुछ दलित और मुस्लिम वोट इस गठबंधन को मिल गए, तो समाजवादी पार्टी को नुकसान होगा और इसका सीधा फायदा बीजेपी को मिलेगा। लेकिन बीजेपी इस बार गलतफहमी में है! इस बार PDA के लोग एकजुट होकर समाजवादी पार्टी के साथ खड़े हैं। बीजेपी चाहे जितनी सियासी चालें चल ले, PDA की एकजुटता को तोड़ना इतना आसान नहीं होगा।
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कन्नौज में आज अखिलेश यादव जी और नेताजी का पुतला फूंकने वालों की पिटाई करने वाली महिला का नाम शशिमा सिंह दोहरे है। सोचिए, एक दलित महिला शशिमा सिंह दोहरे संविधान को खत्म करने की सोच रखने वालों से लड़ रही है। वहीं दूसरी तरफ कुछ दलित संविधान को खत्म करने वालों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहे हैं। यही सबसे बड़ा दुर्भाग्य है कि कोई संविधान बचाने के लिए लड़ रहा है, तो कोई उसी संविधान को खत्म करने वालों का साथ दे रहा है!
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आखिर ये महिला जिस आदमी की पिटाई कर रही है, वह किस पार्टी का नेता है और महिला उसे क्यों मार रही है? @grok जल्दी बताओ पूरा मामला जानने के लिए उत्सुक हूं।
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बाबा साहब भीमराव अंबेडकर जी ने जिस संविधान को बनाकर दलितों, पिछड़ों और शोषितों को आवाज़ दी थी। आज उसी संविधान को खत्म करने की कोशिश करने वाली बीजेपी के साथ मायावती जी खड़ी हैं। इसलिए बाबा साहब भीमराव अंबेडकर जी और मान्यवर कांशीराम जी की आत्मा जहाँ भी होगी, यह सब देखकर बेहद दुखी हो रही होगी।
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