और बच्चे बड़े हो गए
कल जब वो दुनिया में आया था, तब मेरे हाँथ से भी छोटा था, धीरे धीरे मेरे हाँथ छोटे हुए फिर पाँव पता नहीं कब काँधे तक आ गया, आज मेरे से उचाई के मामले में होड़ लगती है, जूतो और कपड़े का नाप बराबर हो गया है।
शायद समय की रफ़्तार वही थी, जो हमेशा से रही होगी पर मुझे ना जाने कुयू बहुत तेज लगी, लगा कहीं टहर जाता कुछ और उसके साथ बैठता बात करता अपने अनुभव साझा करता, यही सब कुछ मेरे माता पिता के साथ हुआ होगा, उन्होंने कभी बताया नहीं मैंने कब उनको बोला आपको कुछ नहीं आता, मुझे याद नहीं उन्हें याद होगा जैसे मुझे याद रहने लगा है जब वो बोलता है।
समय बलवान है आगे बढ़ेगा मेरे या किसी के रोकने से नहीं रुकेगा, मैं रोकना भी नहीं चाहता, जब नदी रुक जाती है तो पानी में से बदबू आने लगती है उसका चलना ही ठीक है।
पिता के रूप में उसके लिए सारे आशीर्वाद है बहुत सारी हिदायते है जो शायद उसे बुरी लगती होंगी जैसे मुझे लगती थी, पर आज याद आती है।
शायद वो समझ पाये, जाओ बेटा खुश रहो, रोटी सबको मिलती है रूखी या घी के साथ पर ख़ुशी नहीं।