समाचारों का कत्ल तो वर्षों पहले ही कर दिया मैडम आपने। सत्ता की चाटुकारिता में लीन हो गईं।
लोकतंत्र में जब लोकहित ही न रहे और तंत्र से भरोसा उठने लगे, तब उस संविधान को बचाने के लिए ज़िंदा ज़मीर वाले लोग सड़कों पर उतरते हैं।
चंद ज़्यादा पैसों के लालच में सत्ता से सवाल-जवाब बंद करके उनके गीत गाना, कैसी पत्रकारिता है ये?
अगर पत्रकारिता होती तो आप इतनी जल्दी-जल्दी चैनलों से नहीं निकाली जातीं।
ये देश है… कोई सोशल मीडिया अकाउंट.. यूट्यूब चैनल नहीं कि अपनी मर्ज़ी से चला दो!
देश संविधान, क़ानून, सिस्टम से चलता है…
समाचार समाप्त हुए ।