नमस्कार 🙏
मैं राजनैतिक परिवार में पैदा हुआ,
और जब मैं छोटा था हम और प्रियंका घर में लेई बनाते थे और रात रात भर पोस्टर चिपकाते थे,
चुनाव की और इस पूरी प्रक्रिया को समझाता हूँ, 24 सितंबर के प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी न कहा-
“मैं करीब 20 साल से चुनाव लड़ रहा हूं और चुनाव की प्रक्रिया, पोलिंग बूथ से लेकर वोटर लिस्ट तक को बहुत गहराई से समझता हूं। कुछ समय पहले हमें लगने लगा कि दाल में कुछ काला है।
चुनाव होते थे, जनता का मूड कुछ और दिखाई देता था, लेकिन चुनाव परिणाम कई बार उससे बिल्कुल अलग नजर आते थे। 2018 में मध्य प्रदेश में हमने चुनाव जीता, लेकिन उसके बाद हमारी सरकार चली गई। ऐसे कई अनुभवों ने हमारे मन में सवाल खड़े किए।
राहुल गांधी ने SIR और मतदाता सूचियों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने चुनाव आयोग के भीतर दो चुनाव आयुक्तों द्वारा उठाई गई आपत्तियों का हवाला देते हुए कहा कि ये मुद्दे अब केवल विपक्ष के आरोप नहीं रह गए हैं, बल्कि चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल सामने आए हैं।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि देश में anti-incumbency यानी सत्ता के खिलाफ जनता का रुझान हर राजनीतिक दल को प्रभावित करता रहा है, लेकिन उनके अनुसार हाल के वर्षों में कुछ चुनावों में यह प्रवृत्ति दिखाई नहीं दे रही। उन्होंने हरियाणा, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों का उदाहरण देते हुए इस पर जवाब मांगा।
राहुल गांधी ने कहा कि मुद्दा सिर्फ वोट का नहीं है। उनके अनुसार लोकतंत्र की पूरी व्यवस्था वोट से शुरू होती है—वोट से संविधान की शक्ति आती है, संविधान से कानून बनते हैं और कानूनों से संस्थाएं चलती हैं।
उन्होंने इसी संदर्भ में “वोट चोरी, कानून चोरी और संस्था चोरी” का मुद्दा उठाया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।