ग्रोथ इन्वेस्टर | सभी पोस्ट मेरे व्यक्तिगत रिसर्च हैं कोई इन्वेस्टमेंट एडवाइज नहीं हैं I मैं सेबी रजिस्टर्ड नहीं हूँ |
#Stockmarket#Investing#GrowthInvesting
NSE IPO आज ओपन हो रहा । सबका एक ही सवाल है, लेना है या नहीं।
पहले एक और सवाल दिमांग में बैठ जाना चाहिए। ये पैसा NSE के काम आएगा, या पुराने मालिक एग्जिट ले रहे हैं।
इश्यू करीब ₹22,562 करोड़ का है। इसमें नया शेयर इशू नहीं हो रहा। पूरा OFS है। मतलब ये पैसा एक्सचेंज के खाते में नहीं जाएगी। SBI, बीमा कंपनियाँ और बाकी पुराने निवेशक अपने हिस्से बेच रहे हैं। कंपनी लिस्ट जरूर होगी। कैश उसके पास नहीं जाएगा।
GMP भी पहले 12 प्रतिशत के आसपास था अभी 8 पर आ गया है। रिटेल के लिए एक लॉट ₹14280 का है। ये आंकड़े मार्केट मूड बताते हैं कम्पनी का बिजनेस नहीं।
अगर 3 साल रखना है तो एक्सचेंज का धंधा अलग से तौलना जरूरी है ।
अगर लिस्टिंग गेन लेकर निकलना है तो वो अलग फैसला है।
दोनों को एक मत समझना।
#NSEIPO#Investing
यदि कंपनी की सेल्स और प्रॉफिटेबिलिटी फ्लैट है लेकिन प्रमोटर और शीर्ष अधिकारियों की सैलरी सेबी की मैक्सिमम लिमिट को छू रही है तो यह फाइनेंसियल डिसिप्लिन की भारी कमी और खराब गवर्नेंस को दर्शाता है।
#CorporateGovernance#ManagementIntegrity
फार्मा सेक्टर में एपीआई बिजनेस कमोडिटी की तरह काम करता है लेकिन जब कोई कंपनी वैल्यू एडेड फॉर्मूलेशन की तरफ शिफ्ट होती है तो उसे मजबूत प्राइसिंग पावर मिलती है और पीई एक्सपेंशन शुरू होता है।
#PharmaSector#BusinessStrategy
भारी कैपेक्स के बाद मैनेजमेंट डेप्रिसिएशन एडजस्टमेंट से नेट प्रॉफिट को दबा सकता है इसलिए असली तस्वीर देखने के लिए केवल बॉटम लाइन की जगह कैश प्रॉफिट को ट्रैक करना ज्यादा सटीक होता है।
#ForensicAccounting#CashProfit
बाजार अतीत के रिकॉर्ड को नहीं बल्कि फ्यूचर विजिबिलिटी को वैल्यू देता है स्टॉक में असली पीई एक्सपेंशन तब शुरू होता है जब मैनेजमेंट अपनी कॉन-कॉल में फ्यूचर ग्रोथ गाइडेंस को अपग्रेड करता है।
#ForwardLooking#PEExpansion
किसी भी मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस में असली वेल्थ क्रिएशन तब ट्रिगर होता है जब कैपेसिटी यूटिलाइजेशन एक ऑप्टिमल थ्रेशोल्ड को पार कर जाए जिससे ऑपरेटिंग लिवरेज का साइकल घूमता है और प्रॉफिट तेजी से बढ़ता है।
#OperatingLeverage#CapacityUtilization
यदि किसी कंपनी की आय का एक बड़ा हिस्सा सिर्फ एक या दो ग्राहकों पर निर्भर है तो किसी एक के जाने से टॉप लाइन क्रैश हो सकती है I
इसलिए पोर्टफोलियो सुरक्षा के लिए हमेशा डायवर्सिफाइड कस्टमर बेस चुनें।
#CustomerConcentration#RiskManagement
60% से घटकर 50% पर आती सेल्स ग्रोथ वाले सुस्त इंजन को बाजार डी-रेट कर देता है जबकि असली वेल्थ वहां बनती है जहां ग्रोथ 20% से 30% की तरफ एक्सीलरेट हो रही हो।
#GrowthInvesting#MarketMomentum
प्रमोटर की बेदाग ईमानदारी निवेश का सबसे कड़ा पिलर है यदि कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर जरा सा भी संदेह पैदा हो जाए तो वित्तीय आंकड़े कितने भी अच्छे हों वहां से बिना इमोशन के एग्जिट करना ही सेफ है।
#PromoterIntegrity#InvestingRules
असली कॉर्पोरेट कैरेक्टर बुरे वक्त में सामने आता है जो प्रमोटर्स क्राइसिस के समय छिपने के बजाय पारदर्शी कमेंट्री देते हैं और टर्नअराउंड का ठोस ब्लूप्रिंट साझा करते हैं वे ही बाजार का अटूट विश्वास जीत पाते हैं।
#InvestorRelations#CrisisManagement
जब कोई नया प्लांट चालू होता है तो शुरुआती क्वार्टर में फिक्स्ड कॉस्ट के कारण प्रॉफिट थोड़ा दबा रहता है लेकिन जैसे ही असेट टर्नओवर रेशियो सुधरने लगे समझ लीजिए कि नया प्लांट रेवेन्यू जेनरेट कर रहा है और बड़ा ब्रेकआउट करीब है।
#AssetTurnover#ValueInvesting
यदि किसी कंपनी के रिसीवेबल डेज लगातार बढ़ रहे हैं तो इसका सीधा मतलब है कि कंपनी माल तो बेच रही है लेकिन बाजार से उसका पैसा समय पर वापस नहीं आ रहा है जो भविष्य के कैश क्रंच का इशारा है।
#WorkingCapital#CashFlow
टर्नअराउंड का पहला असली संकेत सेल्स ग्रोथ में नहीं, बल्कि बैलेंस शीट के इन्वेंट्री डेज के घटते समय दिखता है I
जब तैयार माल सीधे बाजार में पहुंचने लगे तो वर्किंग कैपिटल साइकिल सुधरती है और हिडन कैश जनरेट होता है।
#WorkingCapital#TurnaroundStocks
नेट प्रॉफिट सिर्फ पेपर का इल्यूजन हो सकता है लेकिन कैश फ्लो कभी झूठ नहीं बोलता।
अगर प्रॉफिट बढ़ रहा है पर कैश नहीं तो समझ लीजिए प्रमोटर धंधा चलाने के लिए नया कर्ज ले रहा है।
#CashFlow#FundamentalAnalysis
गिरते हुए शेयर को एवरेज डाउन करना ग्रोथ इन्वेस्टिंग का सबसे बड़ा ब्लंडर है। एक प्रो इन्वेस्टर हमेशा अपने लूजर्स को तुरंत काटता है और केवल मजबूत मोमेंटम वाले विनर्स में पैसा बढ़ाता है।
#InvestingMindset#WealthCreation
बाजार अतीत के रिकॉर्ड को नहीं बल्कि भविष्य को वैल्यू देता है।
जिस दिन कंपनी का मैनेजमेंट अपनी फ्यूचर ग्रोथ गाइडेंस को अपग्रेड करता है ठीक उसी दिन से स्टॉक की असली री-रेटिंग शुरू हो जाती है।
#PEExpansion#StockMarketIndia
बाजार में लांग टर्म वेल्थ बाहरी सुझावों से नहीं बल्कि एक स्ट्रक्चर्ड पर्सपेक्टिव और खुद के कन्विक्शन से बनती है। जब कोई मजबूत स्टॉक बिना फंडामेंटल खराबी के 20% करेक्ट होता है तो यही कन्विक्शन उसे एक बेहतरीन बाइंग ओपर्चुनिटी दिखाता है।
#InvestmentMindset#MultibaggerBlueprint
स्क्रीनर पर 40 का पीई मल्टीपल महंगा लग सकता है, लेकिन अगर नए केपेक्स से अगले साल अर्निंग्स दोगुनी होने वाली है तो फॉरवर्ड पीई घटकर सीधा 20 हो जाएगा। बाजार हमेशा इसी फॉरवर्ड अर्निंग्स और पीई रीरेटिंग के खेल पर चलता है।
#Valuation#ForwardPE
सेल्स ग्रोथ सिर्फ पेपर पर नहीं होनी चाहिए। अगर किसी कंपनी का रेवेन्यू 20%से बढ़ रहा है लेकिन उधारी 40% की रफ्तार से भाग रही है तो यह भविष्य में बैड डेट्स का बड़ा रिस्क पैदा करता है।
असली ग्रोथ वॉल्यूम और मजबूत वर्किंग कैपिटल के सिंक में होती है।
#SalesGrowth#FundamentalAnalysis