लखनऊ में 20 सालों के अंतराल में चौथी बार ऐसी 'श्रद्धा' विष बेल लहलहाती दिखी, जो वैसे विलुप्त होगी, जैसे पहले वाली तिलिस्मी बेलें हुई ? बस, दो- चार दिन की सुर्खियां. सिस्टम के दांत इतने नुकीले नहीं कि यह नेट काट सके ?
-इतिहास है जब ये बेल लहलहाई, राजनीति में खलबली आई ?
#मुझे याद आये- राजीव रंजन वर्मा, कमल सक्सेना, अनिल अग्रवाल , सुलखान सिंह, एसबी शिरडकर , अरुण झा , भवेश कुमार सिंह , नवनीत सिकेरा , दीपक कुमार ( आगरा CP), अमित पाठक, अनंत देव तिवारी आदि -आदि !