पंजाब में नशे के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाना अब जानलेवा हो गया है। और यह भगवंत मान की AAP सरकार के राज में हो रहा है।
मानसा: 'नशा रोको, रोज़गार दो' अभियान चलाने वाले परविंदर सिंह झोटा को दिनदहाड़े गोली मार दी गई जो एक फ़ेसबुक लाइव पर साफ़ दिखी।
संगरूर - मुख्यमंत्री का अपना ज़िला: मज़दूर गुलज़ार सिंह ने मंत्री के सामने गाँव में नशे का सवाल उठाया। परिवार का आरोप है कि उसके बाद उन पर माफ़ी माँगने का दबाव डाला गया। उन्होंने अपनी जान दे दी।
संगरूर: नशे के ख़िलाफ़ बोलने वाले मोहनजीत सिंह पर हिरासत में यातना के आरोप - मामला अब हाईकोर्ट में है।
और झोटा की कहानी में एक बात और है। जब उन्होंने शिकायत की, तो FIR हुई और पुलिस ने बाद में झोटा को भी बुक कर दिया।
जिस सरकार में शिकायत करने वाला भी मुलज़िम बन जाए, वहाँ नशे के सौदागर बेख़ौफ़ क्यों न हों?
CM भगवंत मान जवाब दें: नशे के ख़िलाफ़ लड़ने वालों की हिफ़ाज़त कौन करेगा?
पंजाब के युवाओं का भविष्य तबाह करने वाले इस नशे के साम्राज्य को ख़त्म किए बिना कांग्रेस चैन से नहीं बैठेगी।