मेरी एक लॉस एंजिल्स की सहेली है, जिसका नाम शार्लोट है। वह मुझसे मिलने एक साल पहले भारत आई थी। जब मैं उसे घुमाने ले गई, तो रास्ते में एक भिखारी बैठा था, जो विकलांग था। वह भीख माँग रहा था "बहन जी, कुछ भीख दे दो, मेरे पैर चलने में असमर्थ हैं।" उसने पैरों में पट्टी भी बाँधी हुई थी।
शार्लोट उसे देखकर 5,000 रुपये देने लगी। मैंने उससे कहा, "तू इसे पैसे क्यों दे रही है?" तो वह बोली कि इसकी हालत देखो, इसकी मजबूरी देखो, यह बेचारा है।
मैंने शार्लोट से कहा, "रुक एक मिनट।" फिर मैं भिखारी से बोली, "तू चलकर दिखा दे, तो तुझे 10,000 रुपये दूँगी 2 हजर शार्लोट देगी और 2 हजार मैं दूँगी।"
भिखारी पहले बोला, "मैं चल नहीं पाऊँगा।" तो मैंने कहा, "मैं तुझे पहले भी चलते हुए देख चुकी हूँ। तू मुझसे नाटक मत कर। चलकर दिखा और 4 हजार रुपये ले।"
भिखारी की आँखों में चमक आ गई और वह बोला, "पहले कसम खाओ कि पैसे दोगी।" मैंने कसम खाई। वह तुरंत पैसे लेकर उठ खड़ा हुआ। मैंने कहा, "अब निकल यहाँ से और दोबारा यहाँ दिखना मत। जाकर कोई काम-वाम कर। मेहनत से कमा।"
शार्लोट यह दृश्य देखकर हैरान रह गई और मुझसे बोली, "यहाँ ऐसा भी होता है क्या?"
मैंने शार्लोट से कहा, "यहाँ सिर्फ ऐसा ही नहीं होता। नकली कहानियाँ बनाकर भी भीख माँगी जाती है।"
शार्लोट हैरानी से पूछी, "जैसे?"
तो मैंने उसे सोशल मीडिया पर फैली अजीबोगरीब कहानियाँ दिखाईं झाड़ू से लेकर मटकी तक की सारी कहानियाँ, सोशल मीडिया से ढूँढ-ढूँढकर।
शार्लोट बोली, "इन कहानियों का क्या फायदा मिलता है?"
मैंने कहा, "यही नकली कहानियाँ सुनाकर कुछ लोग आरक्षण माँगते हैं।"
शार्लोट बोली, "ऐसी नकली और फर्जी कहानियों पर कौन सरकार आरक्षण देगी? उसको देश से प्रेम नहीं है क्या? देश को मिटाना चाहते हैं क्या, ऐसी नकली-काल्पनिक कहानियों के आधार पर आरक्षण देकर?"
मैंने कहा, "हमारे देश में नेताओं को देश से प्रेम नहीं, सत्ता से प्रेम होता है।"
शार्लोट बोली, "फिर तो इन्हें भीख माँगने और कुछ न करने की आदत पड़ गई होगी, और अब तो ये हमेशा भीख यानी आरक्षण ही माँगते रहते होंगे।"
मैं मुस्कुरा दी, और वही मेरा जवाब भी था।
शार्लोट बोली, "ईश्वर ही बचाए तेरे इस प्यारे देश को इन भिखारियों से।"
शार्लेट अंग्रेजी में बोली अगर हमारे देश मे ऐसे निक्कमे होते तो हमारा देश कभी भी ग्रेट अमरीका ना बन पाता।