लगता है भाजपा यूपी ने मेरे ऊपर लगा प्रतिबंध हटवा दिया है। पिछले पाँच घंटों में तीन जगह से यूपी चुनाव के लिए वीडियो और ट्वीट के रेट माँगे गए हैं।
संभवतः यह लोग या तो मेरे द्वारा ‘रेट बताने’ के स्क्रीनशॉट ले कर ‘ये देखो GC वारियर, पैसा देख कर बिक गए’ करने वाले हैं, या फिर अंतिम विकल्प सोच कर कि देखो, कहीं ‘’जय योगी’ बोल दे, लड़ाई तो मोदी से है न’ पर मान जाए।
पहली बात तो यह है कि आपकी सरकार के लोग मेरे एक जानकार की कैम्पेन डिजाइन/मार्केटिंग कंपनी का तीन करोड़ से अधिक रुपया, दो वर्षों से रिलीज नहीं कर रहे। तो आपके लिए कोई काम कर के पैसे क्यों फँसाएगा?
एक बता रहा था कि आप लोग सरकार से लेते हो डेढ़ लाख और फील्ड में भटकते पत्रकार को मिलता है 3,000! जी हाँ, तीन हजार! तो सरकार का पैसा तो पत्रकारों को विज्ञापन के रूप में नहीं मिल रहा। एक पोर्टल है, जिसके वीडियो पर तीन हजार व्यू नहीं आते, उसकी बिलिंग 30-35 लाख प्रति महीना है। अब क्या RTI लगा कर पता करूँ कि किसको कितना मिल रहा है?
दूसरी बात, मुझे दस-बीस लाख के लिए अपनी क्रेडिबिलिटी नहीं गँवानी। तो आप लोग अपना पैसा अपने पास रखो। मुझे जाँचने-परखने की आवश्यकता नहीं है। मैं तो वामपंथी, सपाई, कॉन्ग्रेसी हूँ। मुझे सोरोस से पैसे मिल रहे हैं। आप लोग कितना दे दोगे?
जितना पिछले दस-बारह वर्षों में कर दिया है, निःशुल्क, उसी का चुकाने में आपको समय लग जाएगा। तो प्लीज जाँचिए मत। जो बुरे समय में गाली देते हों, साथ छोड़ते हों, घर पर पुलिस भेजते हों, ऐसे धूर्तों के लिए मेरे पास एक भी सकारात्मक वाक्य नहीं है।
मेरा लक्ष्य यूपी चुनाव है। सवर्णों की जब तक सुनवाई नहीं होगी, हमारी स्पष्ट माँगों पर जब तक बात नहीं होगी, मैं लड़ता रहूँगा। या तो जीतूँगा, या हारूँगा, पर समय से पूर्व पीछे नहीं हटूँगा।