Half the people here don't even get the कटाक्ष of Ajeet Bharti. He's simply pointing out that this "Buddha" invocation at international platforms is not happening to promote tourism, this is a subtle messaging for the domestic Ambedkarites.
मुझे ये समझ में नहीं आता कि सबसे बड़े अंबेडकरवादी और दलितवादी अपने आपको कहने वाले मोदी जी, आपने अंबेडकर जी की सबसे बड़ी उपलब्धि, उनके जीवन का सबसे बड़ा थॉट, बाईस प्रतिज्ञाएँ, उसको लेकर कुछ नहीं बनाया। कोई तीर्थ नहीं, कोई धाम नहीं, कुछ नहीं।
मेरा कहना यही है कि मोदी जी को अब अंबेडकर की प्रतिज्ञाओं के लिए एक पहाड़ चुन लेना चाहिए, उसको सामने से फ्लैटन आउट करो और अंबेडकर जी की बाईस प्रतिज्ञाएँ, उसका भी एक स्मारक होना चाहिए ना मोदी जी।
और ये बुद्ध का नाम भी क्यों लेते हो विदेशों में जाकर? बोलो, भारत अंबेडकर की धरती है। (जैसे भारत गांधी की धरती है। गांधी की मार्केटिंग पचास, साठ साल बढ़िया हुई।) अंबेडकर जी का अंतर्राष्ट्रीयकरण कब होगा?
जहाँ-जहाँ गांधी जी की मूर्ति और प्रतिमा विदेशों में है, वहाँ अंबेडकर जी की भी होनी चाहिए। अंबेडकर जी के नाम से एक सिटी बनवा दो, एक बस टर्मिनल कम से कम बनवा दो, एक एयरपोर्ट आपके यहाँ अंबेडकर जी के नाम से होना चाहिए।
अब SC/ST Act को UN में स्वीकृति मिलनी चाहिए, UNGA के बाहर बाबा साहेब का एक स्टेचू अवश्य ही बनना चाहिए। भारत को, मोदी जी को इस विचार को अवश्य ही push करना चाहिए।
जय भीम।