डाटा निकाला था आरक्षण के लिए, लेकिन यहां एक और जबरदस्त ट्रेंड सामने आ गया, मोदी सरकार में बच्चों के आत्महत्या के केस साल दर साल बढ़े हैं, खास कर जब से मोदी सरकार नीलों के प्रति एकतरफा प्यार में पागल हुई है, खास कर 2015 और 2018 में SC ST Atrocities Act में बदलाव के बाद, तो क्या तुष्टिकरण की कीमत आपके बच्चों की जान से चुकाई गई? 2014 में जब मोदी सरकार आई थी तब और अब में 2 गुने का अंतर है, बच्चों से मन की बात के पर्दे के पीछे की एक सच्चाई यह भी है? मामला बेहद गंभीर है, जिम्मेदारो को जवाब देना होगा
जैसे आपको लग रहा है हमे क्या? वैसे ही इन 1,23,918 बच्चों के परिवारों को भी लगता था, वे भी नेता पार्टी संगठन के वफादार बने रहे, लेकिन आज वे सारे परिवार बर्बाद हो चुके हैं, कोई पिण्डदान करने वाला भी नहीं बचा, बताना मेरा काम है बाकी आपकी मर्जी
आप सब इसमें मदद कर सकते हैं, ज़िन्दा बच्चों की जिंदगी बचा सकते हैं, आवाज उठा कर, और उन सारे परिवारों से मुझे मिलवा कर जिनके बच्चों ने आत्महत्या की थी, हम उनका दुख साझा कर उनका मन हल्का भी करेंगे और दुनिया को बताएंगे भी कि बच्चे होनहार थे लेकिन सिस्टम कातिल था जिसने उनकी जान ले ली