हम सोंच रहे थे कि 2040 के आस पास हिन्दू मुस्लिम के बीच गृहयुद्ध होगा, लेकिन मोदी जी की एक तरफा जातीय तुष्टीकरण और की राजनीति ने 2029-30 तक ही जातीय ग्रह युद्ध की स्थिति पैदा कर दी है,
जिसके बैकग्राउंड में -
- दलित, शोषित, पीड़ित, वंचित की अति
- अम्बेडकर फुले को जबरन थोपना
- फर्जी मोदी ऐक्ट (SC/ST Act) की पराकाष्ठा, जो
आज भारत में एक कुटीर उद्योग, और अवैध वसूली
का धन्धा बन चुका है, जिससे सवर्ण से ज्यादा
ओबीसी वर्ग त्रस्त है, क्यूंकि 85% से ज्यादा मुकदमे
उन्हीं पर होते हैं
- मोदी ऐक्ट में ज्यादा से ज्यादा लोगों को फंसाने के
लिए आप लगातार सुपारी की रकम बढ़ाते जा रहे हो,
फर्जी केस पाए जाने पर जिसकी कोई वापसी या
जुर्माना नहीं है, पैसा हराम का आ रहा है क्या....?
- केंद्र द्वारा सवर्ण दमन की पराकाष्ठा,
- यूजीसी ऐक्ट का काला कानून, जिसमें इन्होंने सवर्णों
के बच्चों तक की फिल्डिंग सेट कर दी,
- आरक्षण की अति जिसकी सीमा कहीं कहीं 75% से
भी पार कर चुकी है,
- एक तरफ एससी एसटी से आने वाले सांसद,
विधायक, मंत्री, उच्च अधिकारी, जो वर्षों से लगातार
आरक्षण का लाभ लेकर सम्पन्न हो चुके हैं उसके
बच्चे को सब कुछ मुफ्त है और गरीब सवर्ण जो मिट्टी
के घर में रह रहा है उसका कुछ भी माफ नहीं उसे
किताबें मुफ्त नहीं मिलती हैं, क्या लगता है इसका
गुस्सा जन मानस में नहीं होगा....?
- वामपंथियों अम्बेडकर वादियों द्वारा सनातन धर्म
संस्कृति, देवी देवताओं, धर्म ग्रंथों, धर्म गुरूओं, तीज
त्योहारों के अपमान पर चुप्पी, किसी पर कोई
कार्यवाही नहीं होती खुली छूट है,
- और सबसे बरी हालत तो ब्राह्मणों की है जिन के नर
संहार की धमकियां तो वामपंथियों द्वारा दीवारों से
लेकर अम्बेडकर वादी नेताओं के मंचों पर खुले आम
हो रही है, उनकी बेटियों तक पर बुरी नजर डाली जा
रही है जबरन संबध बनाने के सपने मंचों से जाहिर
किए जा रहे हैं पक्ष विपक्ष सब फेविकोल पीकर बैठे हैं,
लोग कब तक सहेंगे यार.....? कभी तो सब्र टूटेगा लोग अब त्रस्त हो चुके हैं जातीय तुष्टीकरण से 😑
#नितिनशुक्ला