बताओ इस गोबर बुद्धि को ये पता है चन्द्रशेखर बहुजनों के हक की लड़ाई सरकार से लड़ रहा है, लेकिन इसको बहुजनों से लड़ना है
24 सितंबर को लेकर सवर्ण समाज से अपील
24 सितंबर को लेकर मैं सामान्य वर्ग के लोगों से एक महत्वपूर्ण अपील करना चाहता हूं। 24 सितंबर को चंद्रशेखर रावण शक्ति प्रदर्शन के लिए आ रहे हैं। मुझे आशंका है कि वे सवर्ण समाज के लोगों से टकराव चाहते हैं। पिछली बार के आंदोलन में 14 लोगों की हत्या हुई थी। इस बार भी यदि दिल्ली में सवर्ण समाज के लोग वहां आते हैं, तो टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है।
आप लोग बिना तैयारी के वहां जाएंगे और पुलिस भी आपको सुरक्षा नहीं देगी। यदि पुलिस को आवश्यकता पड़ी, तो वह गोली चलाने से भी पीछे नहीं हटेगी।
इसलिए 24 सितंबर के आसपास यदि कोई रैली या प्रदर्शन करने की योजना बना रहा है, तो उस विचार को अभी त्याग देना चाहिए।
हमें किसी के उकसावे में नहीं आना है। सामान्य वर्ग और ओबीसी समाज के लोग, तथा SC/ST एक्ट, यूजीसी की नीतियों और आरक्षण व्यवस्था से प्रभावित लोग, सभी से मेरा विनम्र निवेदन है कि 24 सितंबर को चंद्रशेखर रावण और भीम आर्मी जो करना चाहते हैं, उन्हें करने दीजिए।
वे जंतर-मंतर आएं या पूरी दिल्ली में प्रदर्शन करें, लेकिन हमें उनका सामना नहीं करना है। उनके आसपास बिल्कुल नहीं जाना है। उनके एक, दो या पांच किलोमीटर के दायरे में भी नहीं दिखना है।
उन्हें सरकार के साथ अपनी लड़ाई लड़ने दीजिए। हमें इसमें नहीं पड़ना है। सरकार भी चाहती है कि लोग हिंसा करें और फिर उनके विरुद्ध कार्रवाई की जा सके। यदि किसी व्यक्ति का चेहरा हिंसा में दिखाई दे गया, तो उसका भविष्य बर्बाद हो सकता है।
सरकार अपने आपको बचाने के लिए अलग-अलग लोगों को सामने लाती है और फिर अपनी कार्रवाई को सही ठहराने का प्रयास करती है। हमें ऐसी किसी भी योजना का हिस्सा नहीं बनना है।
हमारे लिए हिंसा से बचना जरूरी है:
मैं बार-बार कह रहा हूँ कि हिंसा मत कीजिए। 24 सितंबर को शक्ति प्रदर्शन मत कीजिए। इसके बाद तीन-चार दिन या सात दिन तक भी ऐसे किसी कार्यक्रम से दूर रहिए। यदि शक्ति प्रदर्शन करना है, तो अक्टूबर या नवंबर में कर सकते हैं। चुनाव की तारीख घोषित होने के बाद भी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखी जा सकती है।
हमें अभी सड़कों पर आने की कोई आवश्यकता नहीं है। हमें सड़कों पर जाकर किसी से पिटने या लड़ने की जरूरत नहीं है। यदि टकराव हुआ, तो आप पर मोदी एक्ट, NSA और अन्य गंभीर धाराएं लगाई जा सकती हैं। आपको लंबे समय तक जेल में रहना पड़ सकता है।
इसलिए 20 से 30 सितंबर के बीच सवर्ण समाज का कोई भी समूह उनके आसपास कहीं भी दिखाई न दे। उन्हें अपना प्रदर्शन करने दीजिए। यदि वे हंगामा करते हैं या तोड़फोड़ करते हैं, तो यह दिल्ली पुलिस, सरकार और उनके बीच का मामला है। हमें इसमें नहीं पड़ना है।
हमें अपना ध्यान उत्तर प्रदेश के चुनाव पर केंद्रित रखना है। हमें अपने तीन मूल एजेंडों पर ध्यान देना है:
1. यूजीसी से संबंधित नीतियां
2. एससी-एसटी एक्ट
3. आरक्षण सुधार (12 मांगें)
यही हमारे मूल मुद्दे हैं। हमें इन्हीं पर केंद्रित रहना है। हिंसा नहीं करनी है। हमें किसी के जाल में नहीं फंसना है और शांतिपूर्ण तथा लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखनी है।