माननीय प्रधानमंत्री जी और उनके दिवंगत पिता का अपमान करना कोई राजनीतिक साहस नहीं, बल्कि सार्वजनिक मर्यादा और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति शर्मनाक अनादर है। ऐसी व्यक्तिगत टिप्पणियाँ राजनीतिक विमर्श के गिरते स्तर को उजागर करती हैं और उन करोड़ों नागरिकों के जनादेश के प्रति अनादर दर्शाती हैं, जिन्होंने लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से अपना नेता चुना है।
लोकतंत्र में असहमति का स्वागत है, लेकिन असहमति तथ्यों, नीतियों और रचनात्मक बहस के आधार पर होनी चाहिए, न कि व्यक्तिगत अपमान और ओछी टिप्पणियों के माध्यम से। प्रधानमंत्री सहित हर जनप्रतिनिधि की आलोचना हो सकती है, लेकिन आलोचना की आड़ में मर्यादा और सम्मान की सीमाएँ लाँघना किसी भी तरह उचित नहीं है।
@narendramodi @BJP4India