श्री गणेशाय नमः
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
"गणपति बप्पा" मोरया!
हे विघ्नहर्ता, सबके जीवन से दुःख दूर करें, सुख-समृद्धि प्रदान करें और हर शुभ कार्य में सफलता दें। 🙏♥️
जय "श्री गणेश" ! 🙏♥️
॥ श्री गणेशाय नमः ॥
🕉️ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
हे विघ्नहर्ता "श्री गणेश" जी, हमारे जीवन के सभी विघ्नों को दूर करें, हर कार्य में सफलता प्रदान करें और अपने आशीर्वाद से सुख, समृद्धि एवं खुशियों से हमारा जीवन भर दें।
गणपति बप्पा मोरया! मंगलमूर्ति मोरया! 🙏♥️
शुभ बुधवार
#GanpatiBappaMorya#ShriGanesh
ऐ गिरिनंदिनी नंदितमेदिनी विश्वविनोदिनि नन्दनते,
गिरिवर विन्ध्य शिरोधि निवासिनी विष्णु विलासिनी जिष्णुनते...
शेर पर सा सजती है मैया, हर संकट को हरती है मैया!
Start your day with the divine Abhishekam Darshan of Shri Kurudumale Maha Ganapathi 🙏
May vinayaka remove every obstacle from our life🙏
Shri Kurudumale Maha Ganapathi Namo namah🚩
Winning Is Temporary, But Character Is Forever..
Your wins show what you’re capable of, but your losses show who you really are. 🌹🤝
They were both raised right with respect.
Your brain can’t always control which thoughts appear, but you can change how you respond to them. This simple neuroscience trick may help break the cycle of negative thinking.
पत्थरों में समाई एक हज़ार साल की कहानी।
तंजावुर का बृहदीश्वर मंदिर जहाँ भक्ति और वास्तुकला एक हो जाते हैं।
तंजावुर का बृहदीश्वर मंदिर जिसे स्थानीय रूप से पेरुवुदैयार कोविल या बिग टेम्पल भी कहा जाता है दक्षिण भारतीय द्रविड़ वास्तुकला का सर्वोच्च उदाहरण है। चोल सम्राट राजराज प्रथम ने 1003 ईस्वी में इसका निर्माण शुरू करवाया और मात्र सात वर्षों में 1010 ईस्वी में इसका अभिषेक किया। मूल रूप से इसका नाम राजराजेश्वरम् था जो बाद में बृहदीश्वर अर्थात महान ईश्वर के रूप में प्रसिद्ध हुआ।
इस मंदिर की सबसे प्रभावशाली विशेषता इसका विमान अर्थात शिखर है जो लगभग 66 मीटर ऊँचा है। यह अपने समय का सबसे ऊँचा मंदिर शिखर था। पूरा ढाँचा ग्रेनाइट पत्थरों से बना है जिन्हें बिना किसी सीमेंट या मोर्टार के इंटरलॉकिंग तकनीक से जोड़ा गया है। शिखर पर स्थित एकल पत्थर का कलश लगभग 80 टन का है जो एक ऐसी इंजीनियरिंग उपलब्धि है जिसकी आज भी प्रशंसा की जाती है।
मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और आज भी जीवित पूजा स्थल है। इसकी दीवारों पर सैकड़ों शिलालेख हैं जो चोल प्रशासन दान नृत्यकारों और संगीतकारों की जानकारी देते हैं। मूर्तियों में भरतनाट्यम के करण भी उकेरे गए हैं। यह UNESCO द्वारा ग्रेट लिविंग चोल टेम्पल्स के रूप में मान्यता प्राप्त विश्व धरोहर स्थल है।
यह श्याम श्वेत तस्वीर मंदिर की उस शाश्वत भव्यता को कैद करती है जो सदियों से काल की धारा को पार कर आज भी खड़ी है। भक्ति कला और इंजीनियरिंग का अद्भुत संगम है। अतुल्य भारत की यह अमूल्य विरासत आज भी गर्व का कारण है।🇮🇳🚩
श्याम-श्वेत तस्वीर: तंजावुर बृहदीश्वर मंदिर परिसर का सुब्रमण्य मंदिर, लगभग 1850 से 1890 के बीच, ब्रिटिश फोटोग्राफर सैमुअल बोर्न या लिनेअस ट्राइप शैली में।❤️🙏
विशाल हिमालय की गोद में विराजमान विघ्नहर्ता श्री गणेश, अपने भक्तों पर बरसा रहे हैं दिव्य कृपा! 🏔️🌺 उनके आशीर्वाद से हर बाधा दूर हो, हर कार्य सफल हो और जीवन सुख, शांति व समृद्धि से भर जाए। 🪷✨ गणपति बप्पा मोरया! ❤️🙏