BJP को एक बहुत बड़ी समस्या से अवगत करा रहा हूँ मैं। कुछ दिनों पहले प्रेमानंद बाबा के पास कुछ लोग पहुँचे थे, हाथ जोड़ कर रोते हुए विनती कर रहे थे कि हम सुबह-सुबह उठ कर सबसे पहले माधव का दर्शन करते हैं, यहाँ कॉरिडोर बनेगा और हमें हटाया जा रहा है। वो पूछ रहे थे कि हम कहाँ जाएँ? ये ऐसे लोग हैं जो दशकों से वहाँ रह रहे हैं। अगर उस समय मैं कुछ लिखता तो शायद कहा जाता कि टाइमिंग गलत है, चुनाव से पहले ये सब लिख कर नैरेटिव को कमजोर नहीं करना है। अब समय आ गया है।
#Varanasi और
#Ayodhya में इस समस्या ने बड़ा गर्क किया है। वाराणसी में प्रधानमंत्री की मात्र 1.52 लाख वोटों से जीत और अयोध्या में भाजपा उम्मीदवार लल्लू सिंह की हार के बाद इस समस्या का पोस्टमॉर्टम होना चाहिए। क्या जहाँ-जहाँ कॉरिडोर बन रहे हैं, वहाँ लोगों को सही से मुआवजा नहीं मिल रहा? उन्हें सुना नहीं जा रहा? इसका कोई निदान निकालना होगा। ऐसे लोगों की संख्या हजारों-लाखों में होती है। इनकी जमीन चली जाती है, घर चले जाते हैं, यादें चली जाती हैं दशकों की, ये भगवान के पास से दूर हो जाते हैं - इन्हें नाराज़ करना भारी पड़ा।
दूसरी बात, तीर्थस्थलों में चमक-दमक लाने के लिए हमें ऐतिहासिक प्रतीकों को हटाना नहीं चाहिए। कोई पुराना पेड़ हो, छोटा ही सही कोई प्राचीन मंदिर हो या फिर कोई भी ऐसी चीज जिससे लोगों की आस्था जुड़ी हो, इन्हें सहेज कर भी हम कॉरिडोर बना सकते हैं। ज़रूरी नहीं कि सब कुछ तोड़-ताड़ के ढाह दिया जाए। तीर्थस्थलों की शुचिता बनाए रखते हुए उनका विकास करना है, उन्हें बैंकॉक बनने से रोकना है और वहाँ जिन लोगों का आशियाना उजाड़ रहा है, इसके लिए संतोषजनक भरपाई करनी है। आगे भी कई तीर्थस्थलों का विकास होना है, पार्टी ये याद रखे।