झारखंड में पेपर लीक के विरोध में छात्रों का आंदोलन लगातार तेज़ हो रहा है। बड़ी संख्या में अभ्यर्थी परीक्षाओं में हो रही धांधली के ख़िलाफ़ सड़क पर उतरकर संघर्ष कर रहे हैं।
लेकिन उनके आंदोलन में करोड़ों रुपये की स्पॉन्सरशिप नहीं है। वहाँ गाली-गलौज नहीं हो रही, देश तोड़ने के नारे नहीं लग रहे, सार्वजनिक संपत्ति पर हमला नहीं हो रहा, और न ही विपक्ष के नेता कैमरे लेकर दौड़े चले आ रहे हैं। दीपके, दास और रंका जैसे तथाकथित “छात्र हितैषी” गायब हो गए हैं।
छात्र आंदोलनों का अपना एक चरित्र होता है।
जो आज राँची में हो रहा है, वह छात्रों का वास्तविक आंदोलन है, परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और न्याय की माँग का आंदोलन।