He has no authority to issue a NOTICE to a Commanding Officer
@ANI
Please get your phrases correct please
And the reply by
@adgpi to this letter should be
1. कार्यक्रम “बिना अनुमति” नहीं था—प्रशासन खुद आयोजन का हिस्सा था
9 सितंबर 2026 के पत्र संख्या 8706/8796 (चौतीस–ए.आर.ए. देवभूमि सां.महो.26/2026-27) का विषय ही यही है:
“दिनांक 19,20 सितम्बर 2026 से देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव के सफल आयोजन हेतु टूरिस्ट अराईवल प्लाजा श्री बद्रीनाथ में आयोजन समन्वय समीक्षा बैठक।”
पत्र में साफ लिखा है कि गढ़वाल स्काउट्स के मेजर/कमान अधिकारी के 11 अगस्त 2026 के पत्र संख्या 4816/पी.आर.आई. के आधार पर यह आयोजन प्रस्तावित है और उसे भव्य रूप देने के लिए व्यवस्थाएं तय की जानी हैं।
2. समीक्षा बैठक खुद प्रशासन ने बुलाई
उसी पत्र में 10.09.2026 प्रातः 11:30 बजे मुख्य विकास अधिकारी चमोली की अध्यक्षता में सीडीओ कार्यालय कक्ष में समीक्षा बैठक आहूत की गई। एसपी चमोली, वन अधिकारी, सीएमओ, लो.नि.वि. अभियंता, कृषि/उद्यान अधिकारी, जिला सूचना अधिकारी, पर्यटन अधिकारी, खादी ग्रामोद्योग, परिवहन और ग्रामीण आजीविका मिशन तक को उपस्थिति का निर्देश दिया गया।
जो प्रशासन बैठक बुला रहा हो, विभागों को बुला रहा हो और “सफल आयोजन” लिख रहा हो, वही बाद में “अनुमति नहीं ली गई” कहे—यह तर्कसंगत नहीं है।
3. नोडल अधिकारी डीएम ने खुद नियुक्त किया
8 सितंबर 2026 के आदेश (संख्या 8795) में जिलाधिकारी गौरव कुमार स्वयं लिखते हैं कि 19–20 सितंबर को टूरिस्ट अराइवल प्लाजा में होने वाले देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव के सफल सम्पादन हेतु मुख्य विकास अधिकारी जनपद चमोली को नोडल अधिकारी नामित किया जाता है, और उनसे अपेक्षित है कि आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें।
आदेश पर “ह0/- 08.09.2026 (गौरव कुमार) जिलाधिकारी चमोली” अंकित है। नोडल अधिकारी नियुक्त करने वाला विभाग बाद में कहे कि कार्यक्रम बिना अनुमति हुआ—यह सीधा विरोधाभास है।
4. पत्र की प्रतियां सेना को भी भेजी गईं
दोनों पत्रों की प्रतियां मेजर/कमान अधिकारी गढ़वाल स्काउट्स, ज्योतिर्मठ (पिन 910700, केयर ऑफ 56 एपीओ) को उनके 11 अगस्त के पत्र के क्रम में सूचनार्थ भेजी गईं। यानी सेना और प्रशासन के बीच पत्राचार पहले से चल रहा था; यह अचानक “सोशल मीडिया से पता चला” वाला मामला नहीं था।
5. मुख्यमंत्री स्वयं समापन समारोह में मुख्य अतिथि थे
19–20 सितंबर का महोत्सव भारतीय सेना और चमोली जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में ऑपरेशन सद्भावना के तहत हुआ। समापन पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मुख्य अतिथि रहे, विजेताओं को पुरस्कार दिए और सेना तथा जिला प्रशासन को सफल आयोजन के लिए बधाई दी। समाचार रिपोर्टों में जिलाधिकारी गौरव कुमार की उपस्थिति भी दर्ज है। सीएम के कार्यक्रम में डीएम प्रोटोकॉल से अनजान रहें—यह दावा कमजोर पड़ता है। 
6. जिला प्रशासन के आधिकारिक हैंडल ने भी इसे संयुक्त आयोजन बताया
@ChamoliDm हैंडल पर स्वयं पोस्ट किया गया कि बद्रीनाथ में 19–20 सितंबर को देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव भारतीय सेना और जिला प्रशासन की संयुक्त पहल है, और बाद में “सेना और स्थानीय नागरिकों के बीच सहयोग को मजबूत करता महोत्सव संपन्न” लिखा गया। जो कार्यालय कार्यक्रम को अपनी संयुक्त पहल बताए, वही बाद में अनुमति न होने का नोटिस जारी करे—यह दोहरी भाषा है।
7. “सोशल मीडिया से जानकारी मिली” वाला तर्क नहीं टिकता
पत्र 11 अगस्त के सैन्य पत्र का हवाला देते हैं, 8–9 सितंबर को आदेश और बैठक होती है, 10 सितंबर को समीक्षा बैठक निर्धारित है, 19–20 सितंबर को कार्यक्रम होता है और सीएम आते हैं। विवाद वायरल होने के बाद 26 सितंबर को नोटिस आना समय-क्रम से “अनजान रहने” से मेल नहीं खाता; यह विवाद के बाद दूरी बनाने जैसा लगता है।
8. स्थान और स्वरूप पहले से तय था
पत्र बार-बार उसी स्थान का नाम लेते हैं—टूरिस्ट अराइवल प्लाजा, श्री बद्रीनाथ। यानी स्थान, तिथि और आयोजन का स्वरूप प्रशासन के संज्ञान में था। बाद में तेज साउंड सिस्टम या प्रस्तुति की शैली पर आपत्ति हो सकती है; वह अलग मुद्दा है। लेकिन “कार्यक्रम ही बिना अनुमति हुआ” कहना इन तीन कागजों से नहीं चलता।
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@ANI