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देश कल भी अंग्रेजों खिलाफ खड़ा था देस अन्याय के खिलाफ खड़ा था पर चिचा कल भी अंग्रेजों साथ खड़े थे अन्याय के साथ खड़े थे
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जातिवादी कभी divert नहीं हुए न होते है उसके लिए देस नहीं उसकी जाती ही सब कुछ होती है जैसे जिहादियो के लिए उसका मजहब होता
Divert नहीं होना है, अपने मुद्दों पर टिके रहना है।
Replying to @dromsudhaa
जातिवादी कभी divert नहीं हुए न होते है उसके लिए देस नहीं उसकी जाती ही सब कुछ होती है जैसे जिहादियो के लिए उसका मजहब होता
Replying to @SurajKrBauddh
भीमराओ सकपाल ने अंग्रेजों से भी आजादी नहीं चाही कभी क्युकी सकपाल सबसे बड़े जातिवादी थे इसलिए उस कठिन समय मे भी सिर्फ अपनी महार जाती के लिए अंग्रेजों का साथ दिया
Replying to @sentwts
दलित तो भीमराओ सकपाल के साहबों की बनाई चीज है इसके पहले ये नहीं था सिर्फ 4 वर्ण थे
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Replying to @Voiceofpavan
अगर इंडिया मे ऐश आराम की जिंदगी काटनी है तो अंग्रेजों के आगे नतमस्तक करना ही होगा
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Replying to @tarunjatav50
ऐसे ही लोगों के लिए मना किया था दादा सिद्धार्थ ने
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पूरी जिंदगी चिचा सरकार से प्यार करते रहे देस के लिए सरकार के खिलाफ चू तक नहीं किया
Replying to @HansrajMeena
पूरी जिंदगी चिचा सरकार से प्यार करते रहे देस के लिए सरकार के खिलाफ चू तक नहीं किया
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चिचा सकपाल सिर्फ नाम के दलित थे बाप अंग्रेजों का सूबेदार था मुंबई के सबसे महंगे स्कूल से पढे थे कोट टाई लगा के फोटो खींचा के फिर भी 40% भी नहीं आया मतलब दिमाग जरूरी होता है स्कूल नहीं
आपके मेरिट का तेल निकालना मुझे अच्छे से आता है.. कुछ नहीं जी . बस अपने बच्चे को यूपी -बिहार से लेकर देश के किसी सरकारी स्कुल में बच्चे को पढ़िये . फिर देखिये कैसे सारे मेरिट का तेल निकल जाता है ...
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Replying to @dromsudhaa
चिचा सकपाल सिर्फ नाम के दलित थे बाप अंग्रेजों का सूबेदार था मुंबई के सबसे महंगे स्कूल से पढे थे कोट टाई लगा के फोटो खींचा के फिर भी 40% भी नहीं आया मतलब दिमाग जरूरी होता है स्कूल नहीं
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Replying to @SurajKrBauddh
india is thousand years old bhimrao sakpal came in eightys but yes bhimrao sakpal worship britishers indeed
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Replying to @nidhiratan11
सिर्फ गुलामी कर सकती है
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पढ़ो भीमराओ सकपाल की तरह की 40% भी न आए और लड़ो अंग्रेजों के गुलामों की तरह अपने ही देस से
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मासूम बच्चों को दूर रखे सकपालि गुलामी का शिकार अबोध बच्चों को ना होने दें
Sc, St , OBC समाज के हिंदुओं से अपील है कि भीङ भाङ वाले पंडाल में जाना हो तो खुद जायें । मासूम बच्चों को ना ले जायें। अपनी बेवकूफी का शिकार अबोध बच्चों को ना होने दें।
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Replying to @dromsudhaa
मासूम बच्चों को दूर रखे सकपालि गुलामी का शिकार अबोध बच्चों को ना होने दें
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Replying to @dromsudhaa
अंग्रेजों की दिन रात अनवरत चाकरी करने के बाद भी भीमराओ सकपाल देसभक्त कैसे बन गए
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Replying to @HansrajMeena
ऐसे चाकर बाबा भी थे जो अंग्रेजों की ट्रेन चलाया करते थे
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दोस्तों 14.10. 1956 को याद रखना ये भीमराओ सकपाल के खिसिआहट बिलबिलाहट खिसियानी बिली खंभा नोचे वाली साल है 1952 और फिर 1954 की राजनीतिक हार की वजह से सकपाल तड़प रहे थे उसकी खीज उस धर्म को छोड़ के निकाली जो धर्म छोड़ने वाले का कत्ल करने को नहीं कहता इस्लाम की तरह
बहुजन इतिहास के नज़रिए से 14 अक्टूबर का दिन का विशेष महत्व है. इसी दिन 1956 को डॉ अम्बेडकर ने बौद्ध धर्म को अपनाया और 22 प्रतिज्ञा की.लेकिन किसी भी अखबार में इस ऐतिहासिक घटना को प्रकाशित नहीं किया जबकि इस घटना को सामाजिक जातिगत के खिलाफ़ एक ऐतिहासिक प्रतिरोध के रूप में देखी जानी चाहिए.@EditorRajan @ScienceJourney2 @BasavanIndia
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Replying to @ProfvikramAU
दोस्तों 14.10. 1956 को याद रखना ये भीमराओ सकपाल के खिसिआहट बिलबिलाहट खिसियानी बिली खंभा नोचे वाली साल है 1952 और फिर 1954 की राजनीतिक हार की वजह से सकपाल तड़प रहे थे उसकी खीज उस धर्म को छोड़ के निकाली जो धर्म छोड़ने वाले का कत्ल करने को नहीं कहता इस्लाम की तरह
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दोस्तों 14.10. 1956 को याद रखना ये भीमराओ सकपाल के खिसिआहट बिलबिलाहट खिसियानी बिली खंभा नोचे वाली साल है 1952 और फिर 1954 की राजनीतिक हार की वजह से सकपाल तड़प रहा था उसकी खीज उस धर्म को छोड़ के निकाली जो धर्म छोड़ने वाले का कत्ल करने को नहीं कहता इस्लाम की तरह
धर्मचक्र परिवर्तन दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं.., आज ही के दिन 14 अक्टूबर 1956 को बाबा साहेब अंबेडकर ने 22 प्रतिज्ञा लिए थे! – जय भीम , नमो बुद्धाय 🙏
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Replying to @spek000000
दोस्तों 14.10. 1956 को याद रखना ये भीमराओ सकपाल के खिसिआहट बिलबिलाहट खिसियानी बिली खंभा नोचे वाली साल है 1952 और फिर 1954 की राजनीतिक हार की वजह से सकपाल तड़प रहा था उसकी खीज उस धर्म को छोड़ के निकाली जो धर्म छोड़ने वाले का कत्ल करने को नहीं कहता इस्लाम की तरह
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Replying to @raviparmarIN
दोस्तों 14.10. 1956 को याद रखना ये भीमराओ सकपाल के खिसिआहट बिलबिलाहट खिसियानी बिली खंभा नोचे वाली साल है 1952 और फिर 1954 की राजनीतिक हार की वजह से सकपाल तड़प रहा था उसकी खीज उस धर्म को छोड़ के निकाली जो धर्म छोड़ने वाले का कत्ल करने को नहीं कहता इस्लाम की तरह
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दोस्तों 14.10. 1956 को याद रखना ये भीमराओ सकपाल के खिसिआहट बिलबिलाहट खिसियानी बिली खंभा नोचे वाली साल है 1952 और फिर 1954 की राजनीतिक हार की वजह से सकपाल तड़प रहा था उसकी खीज उस धर्म को छोड़ के निकाली जो धर्म छोड़ने वाले का कत्ल करने को नहीं कहता इस्लाम की तरह
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दोस्तों 14.10. 1956 को याद रखना ये भीमराओ सकपाल के खिसिआहट बिलबिलाहट खिसियानी बिली खंभा नोचे वाली साल है 1952 और फिर 1954 की राजनीतिक हार की वजह से सकपाल तड़प रहा था उसकी खीज उस धर्म को छोड़ के निकाली जो धर्म छोड़ने वाले का कत्ल करने को नहीं कहता इस्लाम की तरह
धम्मचक्क पवत्तन दिवस की हार्दिक मंगलकामनाये।
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Replying to @SurajKrBauddh
दोस्तों 14.10. 1956 को याद रखना ये भीमराओ सकपाल के खिसिआहट बिलबिलाहट खिसियानी बिली खंभा नोचे वाली साल है 1952 और फिर 1954 की राजनीतिक हार की वजह से सकपाल तड़प रहा था उसकी खीज उस धर्म को छोड़ के निकाली जो धर्म छोड़ने वाले का कत्ल करने को नहीं कहता इस्लाम की तरह
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Replying to @raviparmarIN
दोस्तों 14.10. 1956 को याद रखना ये भीमराओ सकपाल के खिसिआहट बिलबिलाहट खिसियानी बिली खंभा नोचे वाली साल है 1952 और फिर 1954 की राजनीतिक हार की वजह से सकपाल तड़प रहा था उसकी खीज उस धर्म को छोड़ के निकाली जो धर्म छोड़ने वाले का कत्ल करने को नहीं कहता इस्लाम की तरह
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दोस्तों 14.10. 1956 को याद रखना ये भीमराओ सकपाल के खिसिआहट बिलबिलाहट खिसियानी बिली खंभा नोचे वाली साल है 1952 और फिर 1954 की राजनीतिक हार की वजह से सकपाल तड़प रहा था उसकी खीज उस धर्म को छोड़ के निकाली जो धर्म छोड़ने वाले का कत्ल करने को नहीं कहता इस्लाम की तरह
हिन्दू धर्म में पैदा हुआ,लेकिन हिन्दू रहकर मरूंगा नहीं।
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Replying to @Voiceofpavan
दोस्तों 14.10. 1956 को याद रखना ये भीमराओ सकपाल के खिसिआहट बिलबिलाहट खिसियानी बिली खंभा नोचे वाली साल है 1952 और फिर 1954 की राजनीतिक हार की वजह से सकपाल तड़प रहा था उसकी खीज उस धर्म को छोड़ के निकाली जो धर्म छोड़ने वाले का कत्ल करने को नहीं कहता इस्लाम की तरह
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दोस्तों 14.10. 1956 को याद रखना ये भीमराओ सकपाल के खिसिआहट बिलबिलाहट खिसियानी बिली खंभा नोचे वाली साल है 1952 और फिर 1954 की राजनीतिक हार की वजह से सकपाल तड़प रहा था उसकी खीज उस धर्म को छोड़ के निकाली जो धर्म छोड़ने वाले का कत्ल करने को नहीं कहता इस्लाम की तरह
दोस्तों कल ऐतिहासिक दिन है, 14 अक्टूबर 1956 को बाबासाहेब अंबेडकर ने हिंदू धर्म को त्यागकर बुद्ध धम्म को अपनाया था, साथ ही उन्होंने 22 प्रतिज्ञाएँ भी ली थी, "मैं ब्रह्मा विष्णु महेश राम कृष्ण गौरी गणेश को ईश्वर नहीं मानूँगा और ना ही उनकी पूजा करूंगा" अब बाबासाहेब अंबेडकर के अनुयायी कल पूरे देश में यह प्रतिज्ञाएं दोहराएंगे और लाखों की संख्या में बुद्ध धम्म को अपनाएंगे, कल का दिन ऐतिहासिक है, मैं भी परिवार सहित इन प्रतिज्ञाओं को दोहराऊंगा, जय भीम ✊
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बुद्ध का सकपालियों से क्या लेना देना बे पर सकपालियों का है की उसको सवर्णों की करनी गुलामी ही है वो सरिरिक करे जमीदार राजा ठाकुर रूप मे या मानसिक गुलामी भगवान के रूप मे
भारत का सबसे प्राचीन धर्म बौद्ध धम्म है. मेहरगढ़ और सिंधु घाटी सभ्यता बौद्ध सभ्यता थी. बौद्ध सभ्यता 6000-8000 साल से ज्यादा प्राचीन धर्म है. प्राचीन काल में महाराष्ट्र भी बौद्ध सभ्यता का हिस्सा था. अजंता एलोरा, कार्ला गुफा, कन्हेरी गुफा, एलिफेंटा गुफा, नालासोपारा आदि बौद्ध सभ्यता केंद्र थीं. अभिजीत दीपके ने अपनी दादी जी का अंतिम संस्कार से लेकर बाकी सभी रीति बौद्ध परंपरा के अनुसार किया. बौद्ध भिक्षु जी के आशीर्वाद से अभिजीत दीपके ने बोधिवृक्ष का रोपण किया. बौद्ध धम्म केवल आस्था नही बल्कि तर्क और वैज्ञानिक सोच का मार्ग है. बौद्ध धम्म में संदेश है प्रकृति की रक्षा करो. पर्यावरण और प्रकृति सुरक्षित है तभी मानव सभ्यता सुरक्षित है.
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Replying to @KraantiKumar
बुद्ध का सकपालियों से क्या लेना देना बे पर सकपालियों का है की उसको सवर्णों की करनी गुलामी ही है वो सरिरिक करे जमीदार राजा ठाकुर रूप मे या मानसिक गुलामी भगवान के रूप मे
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अबे जाहिल बुद्ध मनु कुल मे पैदा हुए एक सवर्ण थे जिसकी पाव तुम सकपाली पूजते हो तुम सकपालियों को सवर्णों की गुलामी ही करनी है बस सिर्फ उसके रूप अलग अलग होते है जमीदार ,राजा , भगवान अबे जाहिल शिव कहा पैदा हुए उनके पिता और माता का नाम बता दे
Shiva was born in Buddhism,not Hinduism.
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Replying to @Voiceofpavan
अबे जाहिल बुद्ध मनु कुल मे पैदा हुए एक सवर्ण थे जिसकी पाव तुम सकपाली पूजते हो तुम सकपालियों को सवर्णों की गुलामी ही करनी है बस सिर्फ उसके रूप अलग अलग होते है जमीदार ,राजा , भगवान अबे जाहिल शिव कहा पैदा हुए उनके पिता और माता का नाम बता दे
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दोगलागिरी पढ़ ले सकपाली फिर संरक्षित कर ले आने वाली पीढ़ी के लिए,
जल्द ही भारत सरकार महात्मा फूले की किताब गुलामगिरी पर बेन लगा सकती है, उससे पहले इसे पढ़ ले और संरक्षित कर ले आने वाली पीढ़ी के लिए, 🔥 मनुवादी लोगों को आपत्ति है कि इसमें हमारे इष्ट ब्रह्मा को अपमानित किया गया है, सरस्वती के शोषण की व्याख्या की गई है और बेटिचोड र*डीबाज जैसे शब्द उपयोग किए गए हैं, यह किताब शूद्रों को ग़ुलाम बनाने की पूरी व्यवस्था का वर्णन करती है, कैसे विदेशी लोग आए और उन्होंने साजिशन देश के बहुजनों को ग़ुलाम बनाया, महात्मा ज्योतिबा फुले उस समय के सबसे बड़े विद्वान और समाज सुधारक थे ।
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Replying to @raviparmarIN
दोगलागिरी पढ़ ले सकपाली फिर संरक्षित कर ले आने वाली पीढ़ी के लिए,
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मनुवादीयो की गुलामी सकपालि करते भी है और रोते भी है क्षत्रिय सिद्धार्थ (बुद्ध)
अभिजीत दीपके की दादी का अंतिम संस्कार बौद्ध धर्म के रीति रिवाजों के अनुसार किया गया. अभिजीत दीपके का परिवार बौद्ध धम्म अनुयायी है. महाराष्ट्र में बौद्ध आबादी 65,31,200 के करीब है यानी बौद्ध आबादी 5.81% है. महाराष्ट्र का हर दसवां आदमी बौद्ध धम्म अनुयायी है. भारत में कुल बौद्ध आबादी का 77% महाराष्ट्र में रहते हैं. बहुजन राजनीति का गढ़ उत्तर प्रदेश में केवल 2,06,285 लोग बौद्ध हैं यानी राज्य की आबादी के अनुपात में केवल 0.10% भारत की सबसे प्राचीन सभ्यता बौद्ध सभ्यता है. तकरीबन 8000 साल पुरानी. भारत का इतिहास यहीं से शुरू होता.
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Replying to @KraantiKumar
मनुवादीयो की गुलामी सकपालि करते भी है और रोते भी है क्षत्रिय सिद्धार्थ (बुद्ध)
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Replying to @anarkaliofara
दीदी डर गई दीदी तुमको पहले ही बोला था तुम एक कायर हो रही बात मोदी की तो वो एक घोर जातिवादी है जो बाकी पार्टी की तरह देस के लिए खतरा है पर तुम जैसे लोग इसपे नहीं बोलते क्युकी तुम लोग खुद जातिवादी हो
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तलवे चाटता हुआ
ये जो आज दिल्ली पुलिस के पक्ष में हैं , ये वही हैं जिनके बाप - दादा- पुरखे अंग्रेज़ों के तलवे चाट रहे थे और मुगलों की दरबारी करते थे।
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Replying to @dromsudhaa
तलवे चाटता हुआ
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देख ले झा2 तेरी अप्पी डर के डिलीट कर दिया जो बका था सुरू मे ही तेरे अप्पी से बोल दिया की तू कायर है
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वो बात नहीं बोलने चाहिए जो बाद मे डिलीट करने पड़ी इसलिए सुरू मे ही कह दिया था तूम कायर हो
जिसने गोधरा की ट्रेनें जलवाई वो कुछ ट्रेनों को कैंसिल करवाया इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं!
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Replying to @anarkaliofara
वो बात नहीं बोलने चाहिए जो बाद मे डिलीट करने पड़ी इसलिए सुरू मे ही कह दिया था तूम कायर हो
मनुवादि का पाव पूजने वाला सकपाल
भीम प्रतिज्ञा 🔥🔥
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Replying to @raviparmarIN
मनुवादि का पाव पूजने वाला सकपाल
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Replying to @dromsudhaa
जब लोग इन सकपालियों की इसी हरकत को देख के इस कोम को इसकी औकत बताते है इसका सच फिर ये रूदाली करने लगते है 5000 साल तक मनुवादियों ने रेल दिया
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Replying to @dromsudhaa
मटका और झाड़ू के लिए
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Replying to @raviparmarIN
अंग्रेजों से वफादारी सकपालियों का पूराना इतिहास रहा है 1940 हो या आज का मस्क हो सकपालियों के असली बॉस अंग्रेज थे है और रहेंगे
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Replying to @raviparmarIN
चल बे लुटेरे फर्जी
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वो गुलामी का दौर रहा हो या फिर आज का सकपालियों की अंग्रेजों के प्रति वफादारी मे रति भर का अंतर नहीं आया है सकपालियों के असली बॉस अंग्रेज पहले भी थे और आज भी अंग्रेज ही बॉस है
एलन मस्क तो रुकने का नाम नही ले रहे हैं. आज तो उन्होंने मुकेश अंबानी पर व्यंग्यात्मक तरीके से हमला किया. एलन मस्क ने लिखा, Dear Prime Minister Ambani. मुझे यह समझने में तनिक देर हो गयी कि भारत के असली बॉस आप ही हैं. इसके लिए मेरी कृपा मेरी विन्रम माफी को स्वीकार करें. एलन मस्क ने आगे मुकेश अंबानी पर ढेर सारा आरोप लगाया. अगर 1980 के दशक में रिलायंस बनाम वाडिया की राइवलरी के बाद आज तक अंबानी पर किसी ने सीधे आरोप नही लगाया. एलन मस्क ने मुकेश अंबानी का मजाक बना दिया. मुकेश अंबानी भी सोच रहे होंगे किससे पाला पड़ गया जो हाथ धोकर पीछे पड़ा है. मुकेश अंबानी एलन मस्क के आरोपों को ना निगल पा रहे हैं ना उगल पा रहे हैं.
Replying to @KraantiKumar
वो गुलामी का दौर रहा हो या फिर आज का सकपालियों की अंग्रेजों के प्रति वफादारी मे रति भर का अंतर नहीं आया है
तेरे जैसे सकपालियों की वफादारी अंग्रेजों के लिए अटूट रही है 1942 के अंग्रेज हो या 2026 का एलोन मसक हो
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Replying to @TarksheelAdda
चल बे फर्जी सकपाली कुछ भी झूठ बकता है
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दोगले सकपाली
इस बात से पूरा देश सहमत है 🔥