पहले शिक्षा के नाम पर और अब SIR और चीफ इलेक्शन कमिश्नर के खिलाफ दिल्ली और अन्य जगहों पर जो तोड़फोड़ और हंगामा किया जा रहा है, उस पर होने वाले खर्च का वहां कौन कर रहा है? भीड़ जुटाने के लिए पैसे दिए जा रहे हैं, उन्हें दिन भर खाना खिलाने का पैसा कौन दे रहा है? क्या कोई नेता दे रहा है? क्या कोई पार्टी दे रही है?नहीं।
यह वही विदेशी ताकतें हैं जो कभी नहीं चाहते कि भारत में शांति हो, स्थिरता हो, और विकास हो।
मशहूर वकील हरीश साल्वे ने मेघा पाटेकर का उदाहरण दिया कि किस तरह से सौराष्ट्र के तीन करोड़ लोगों को प्यासा मारने के लिए मेघा पाटेकर को मोहरा बनाया गया था। सालों तक नर्मदा बचाओ आंदोलन के नाम पर हंगामा किया गया। आदिवासियों का कोई भला तो नहीं हुआ लेकिन मेरा पाटकर मुंबई के आलीशान बंगले में बजे से दिन गुजर रही है।
अच्छी बात यह रही कि उसे समय के सुप्रीम कोर्ट ने आम लोगों का साथ दिया। इन विदेशी भाड़े के टट्टुओं का नहीं।