1990।।।।
रुचिका गहरोत्रा 14 वर्षीय टेनिस खिलाड़ी थी।अपनी सहेली आराधना के साथ प्रैक्टिस करने गई थी।उस समय टेनिस एसोसिएशन के अध्यक्ष आईपीएस अधिकारी एसपीएस राठौड़ ने उन्हें देखा तो अपने रूम में बुलाया।
आराधना को एसपीएस राठौड़ ने ये कहकर बाहर भेज दिया की जाओ कोच को बुलाकर लाओ।वो अकेली रुचिका के पास आया और उसका हाथ पकड़ कर खींच लिया और छेड़ छाड़ करने लगा।रुचिका चिल्लायी तो उसकी सहेली आराधना आई और उसने भी ये सब देखा।
एसपीएस राठौड़ ने उनको धमकाया की किसी को बताया तो बहुत बुरा होगा।लेकिन रुचिका,उसकी सहेली और उनके परिवार ने हिम्मत दिखायी और पुलिस में कंप्लेंट दे दी।
उस कंप्लेंट पर तो कोई एक्शन हुआ नहीं उल्टा रुचिका के भाई पर चोरी के झूठे मुकदमे लगा दिए गए और थर्ड डिग्री टार्चर किया गया।उसके भाई को नंगा करके उसके घर के आगे से लेकर जाते ताकि रुचिका टूट जाये।
पुलिस वाले सिंपल ड्रेस में रुचिका के घर जाते।धमका कर आते।उसको स्कूल से निकलवा दिया।टेनिस पे रोक लगवा दी।रुचिका डिप्रेशन में चली गई और 2009 एक दिन उसने अपनी जान दे दी।
उस समय की कांग्रेस और चौटाला सरकारों ने राठौड़ के ख़िलाफ़ कोई कार्यवाही तो छोड़ो उसे प्रमोशंस दी।
उसे डीजीपी तक बना दिया।
लेकिन परिवार क़ानूनी लड़ाई लड़ता रहा और राठौड़ को कोर्ट से सजा करवायी।
उस समय की सरकारें लोकतांत्रिक सरकारें थी
और अब तानाशाही चल रही है।