प्रेम मेरे लिए
राधा-सा समर्पण है,
मीरा-सी दीवानगी है,
और कृष्ण अंतर्मन की
शाश्वत उपस्थिति हैं।
न पाने का कोई मलाल नहीं,
न खोने का कोई भय।
बस हर श्वास में उनका स्मरण,
हर धड़कन में उनका नाद है।
प्रेम वह नहीं जो संसार देखे,
प्रेम वह है जो आत्मा जीए।
जहाँ "मैं" समाप्त हो जाए,